अजमेर। रिपोर्ट टाइम्स।
राजस्थान के अजमेर में शनिवार सुबह एक सनसनीखेज घटना ने सभी को चौंका दिया। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की गाड़ी पर फायरिंग हुई, जब वे अजमेर से दिल्ली जा रहे थे। यह घटना गेगल थाना क्षेत्र में हुई, जहां उनकी कार को निशाना बनाया गया।
गुप्ता ने दावा किया कि उनकी गाड़ी पर गोली चलाई गई, और वाहन पर गोली के निशान स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। हालांकि, गनीमत रही कि इस हमले में उन्हें कोई चोट नहीं आई और वे सुरक्षित बच गए। जैसे ही घटना की जानकारी मिली, अजमेर एसपी वंदिता राणा सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से गोली के खोखे की तलाश शुरू कर दी है और गुप्ता से विस्तार से जानकारी ली जा रही है।
यह घटना उस समय हुई जब विष्णु गुप्ता अजमेर दरगाह विवाद से जुड़े एक याचिकाकर्ता के रूप में सुर्खियों में हैं। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अब सवाल उठ रहा है कि यह हमला एक सुनियोजित साजिश है या कोई अन्य कारण इसके पीछे है। पुलिस हर पहलू की गहन जांच कर रही है।
अजमेर दरगाह विवाद से जुड़ा मामला
विष्णु गुप्ता ने हाल ही में दावा किया कि अजमेर दरगाह एक प्राचीन शिव मंदिर के स्थान पर बनी है। इस विवाद ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर हलचल मचा दी है। 24 जनवरी को अजमेर सिविल न्यायालय में इस संबंध में सुनवाई हुई थी। गुप्ता ने अदालत और पुलिस प्रशासन से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी।
गुप्ता ने पिछले साल अजमेर जिला अदालत में याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने दरगाह के स्थान पर प्राचीन शिव मंदिर होने का दावा किया। उन्होंने क्षेत्र का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मांग की थी। अदालत ने 27 नवंबर 2024 को याचिका स्वीकार कर इस मामले में दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक मंत्रालय, और एएसआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
सुरक्षा बढ़ाने की मांग
विष्णु गुप्ता ने सुनवाई के दौरान अदालत में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ इकट्ठा होती है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका रहती है। इसके लिए उन्होंने विशेष सुरक्षा इंतजाम की मांग की।
गाड़ी पर फायरिंग की घटना के बाद पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। पुलिस फायरिंग की मंशा और हमलावरों की पहचान करने में जुटी है। हर पहलू को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है।
चूंकि मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन और न्यायपालिका पर इसे निष्पक्ष और सुरक्षित रूप से निपटाने का दबाव है। सभी की नजरें मामले की अगली सुनवाई और प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं
