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EV सेक्टर के लिए क्यों खास रहने वाला ये बजट.

रिपोर्ट टाइम्स।

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है. देश में हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ईवी उद्योग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. ऐसे में आगामी यूनियन बजट 2025 से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, खासकर ईवी सेगमेंट की बड़ी उम्मीदें हैं. इस क्षेत्र की कंपनियों ने सरकार के सामने अपने सुझाव और मांगें रखी हैं.

टैक्स में रियायतें और जीएसटी घटाने की जरूरत

ईवी कंपनियों की प्रमुख मांग है कि ईवी बैटरी पर जीएसटी की दर को मौजूदा 18% से घटाकर 5% किया जाए. इससे ईवी की लागत कम होगी और ग्राहकों को ज्यादा किफायती विकल्प मिलेंगे. इसके अलावा, ईवी लोन पर ब्याज दरों को कम करने की मांग भी की गई है, ताकि ईवी खरीदने वालों को वित्तीय सहायता मिल सके.

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास

भारत में ईवी के व्यापक उपयोग के लिए मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यक है. Oben Electric और अन्य कंपनियों ने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने का अनुरोध किया है. बजट में चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण और संचालन के लिए विशेष फंड की घोषणा हो सकती है.

घरेलू बैटरी निर्माण और PLI स्कीम

बैटरी मैन्युफैक्चरिंग ईवी सेक्टर का अहम हिस्सा है. घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए PLI स्कीम लागू करने की मांग की जा रही है. Maxvolt Energy जैसी कंपनियां चाहती हैं कि बैटरी निर्माण और आरएंडडी (R&D) के लिए अतिरिक्त फंडिंग और टैक्स छूट मिले.

FAME-II स्कीम का विस्तार

FAME-II स्कीम के तहत ईवी खरीदने पर सब्सिडी मिलती है. बजट में इसके विस्तार और नए लक्ष्य तय किए जाने की उम्मीद है. इससे प्राइवेट और कॉमर्शियल ईवी की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा.

ग्रीन बॉन्ड और लॉन्ग टर्म सब्सिडी

क्रेडिफिन लिमिटेड के सीईओ शल्य गुप्ता का मानना है कि सरकार ग्रीन बॉन्ड जारी कर सकती है, जिसका उपयोग ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए किया जाएगा. इसके साथ ही, लॉन्ग टर्म सब्सिडी से ईवी निर्माण को नई गति मिल सकती है.

सरकार से ईवी सेक्टर की उम्मीदें

सरकार को ईवी सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने और इसे सस्टेनेबल बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है. ईवी कंपनियों ने आरएंडडी में निवेश, सब्सिडी बढ़ाने, और ईवी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स के लिए इंसेंटिव देने की मांग की है. इसके अलावा, जीएसटी संरचना को सरल बनाने और ईवी लोन पर टैक्स बेनिफिट्स देने की जरूरत है.

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