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PKC-ERCP के समझौते में क्या? केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने घनश्याम तिवाड़ी को क्या बताया?

रिपोर्ट टाइम्स।

राजस्थान में पार्वती- काली सिंध-चंबल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP) पर सियासत गरमा रही है, विपक्ष भाजपा सरकार पर समझौते को लेकर सवाल उठा रहा है। मगर अब सरकार ने विपक्ष को इन सभी सवालों का जवाब दे दिया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में इस प्रोजेक्ट को लेकर हुए समझौते की जानकारी दी गई।

सरकार ने दी समझौते की जानकारी

राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से PKC-ERCP के समझौते को लेकर सियासत गरमा रही है। विपक्ष इस मुद्दे पर सड़क से सदन तक हंगामा कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार समझौते की जानकारी छुपा रही है, सिंचाई के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए जा रहे थे। मगर अब सरकार ने विपक्ष के इन सभी सवालों का जवाब दे दिया है। राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने संसद में इस प्रोजेक्ट पर सवाल पूछा, इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से इस प्रोजेक्ट के MoU की जानकारी दे दी गई है।

PKC-ERCP के समझौते में क्या ?

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से बताया गयाकि PKC-ERCP प्रोजेक्ट से राजस्थान को पेयजल के लिए 1744 MCM पानी मिलेगा। इसके अलावा दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर को 205 एमसीएम और सिंचाई के लिए भी 2.5 लाख हैक्टेयर कमांड एरिया को 1360 एमसीएम पानी दिया जाएगा। इस दौरान यह भी बताया गया कि 28 जनवरी को दिल्ली में PKC की प्लानिंग और DPR तैयार करने के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश और केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के बीच MOU हुआ था। इस योजना का नाम अब राम सेतु परियोजना कर दिया है।

विपक्ष को सवालों का मिला जवाब?

राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच PKC-ERCP समझौते को लेकर अभी तक राजस्थान में सियासत गरमा रही थी। विपक्ष आरोप लगा रहा था कि सरकार समझौते की जानकारी छुपा रही है, इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? क्या इसमें सिंचाई के लिए प्रावधान नहीं है? इस मुद्दे पर सड़क से सदन तक विपक्षी नेता सरकार पर हमला बोल रहे थे। इस बीच राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने राज्यसभा में इसे लेकर सवाल किया, जिसके जवाब में इस प्रोजेक्ट के समझौते की जानकारी सार्वजनिक की गई है।

राजस्थान के इन शहरों की बुझेगी प्यास

PKC-ERCP से राजस्थान के कई शहरों की प्यास बुझेगी। इनमें टोंक, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, दौसा करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली, बहरोड़, झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, दूदू, अजमेर, ब्यावर केकड़ी शामिल हैं। पेयजल के साथ सिंचाई का पानी भी मिलेगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश को भी इस प्रोजेक्ट से 6 लाख हैक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। वहीं ग्वालियर, रतलाम, मुरैना सहित कई शहरों को पीने का पानी मिल पाएगा।

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