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देश की सुरक्षा में तैनात अर्धसैनिक बलों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा खुलासा

जोधपुर। रिपोर्ट टाइम्स।

देश की सुरक्षा में तैनात अर्धसैनिक बलों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। जोधपुर में सीमा सुरक्षा बल भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया, जिससे यह साफ हो गया कि भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली चल रही है। यह मामला अकेले जोधपुर तक सीमित नहीं है, इससे पहले भी रेलवे, पुलिस और सेना की भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है, जहां पैसों के दम पर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने का संगठित खेल चलता रहा है।

जोधपुर स्थित बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। एक अभ्यर्थी के फोटोग्राफ और फिंगरप्रिंट में गड़बड़ी पाई गई, जिसके बाद बीएसएफ अधिकारियों ने कड़ी जांच शुरू की। जब सख्ती से पूछताछ की गई तो फर्जी कैंडिडेट ने कबूल किया कि परीक्षा किसी और ने दी थी और इसके लिए 3 लाख रुपये का सौदा हुआ था।

BSF भर्ती में संभवत: पहली बार ऐसा मामला सामने आया

सीमा सुरक्षा बल  में भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास कराकर नौकरी हासिल करने की साजिश रची गई। यह घोटाला पकड़े जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है।

बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन में खुली पोल

सहायक प्रशिक्षण केंद्र के उप कमांडेंट मिथिलेश कुमार ने बताया कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की आरक्षक भर्ती में विकास सिंह का चयन हुआ था। उसे BSF में एसएसडी जीडी 2024 भर्ती के तहत नियुक्त किया गया था। जब 21 जनवरी को रिपोर्टिंग हुई और दस्तावेजों व बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन किया गया, तब यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।

3 लाख में सौदा, ‘तुम्हें बस जॉब करनी है’

विकास सिंह ने कबूल किया कि उसकी जगह परीक्षा और फिजिकल टेस्ट मनजीत नामक व्यक्ति ने दिया था। मनजीत को इसके बदले 2 लाख रुपये दिए गए, जबकि पूरे सौदे की कीमत 3 लाख रुपये थी। मनजीत से विकास सिंह की मुलाकात एक शादी समारोह में हुई थी, जहां उसने फर्जीवाड़े का यह ऑफर दिया। मनजीत ने कहा था कि “मैं तुम्हारी जगह परीक्षा और फिजिकल टेस्ट दूंगा, तुम्हें सिर्फ नौकरी करनी है!”

कैसे पकड़ा गया फर्जी कैंडिडेट?

  • फोटो और अंगूठे के निशान का मेल नहीं हुआ, जिसके बाद शक गहराया।
  • जांच में पता चला कि परीक्षा किसी और ने दी थी, जबकि असली कैंडिडेट डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन के लिए खुद आया था।
  • आरोपी विकास सिंह ने स्वीकार किया कि उसे 3 लाख रुपये में फर्जी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास कराई गई।
  • मामला मंडोर थाने से कानपुर ट्रांसफर कर दिया गया, जहां मुख्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है।

क्या यह संगठित रैकेट का हिस्सा?

ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया हो। पिछले कुछ सालों में SSC, रेलवे, पुलिस और सेना की भर्तियों में भी इस तरह के रैकेट का खुलासा हुआ है। फर्जी कैंडिडेट्स से परीक्षा दिलवाने के लिए गैंग सक्रिय हैं, जो मोटी रकम लेकर अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने का ठेका लेते हैं।

अब सवाल उठता है:

BSF जैसी अहम सुरक्षा एजेंसी में यह फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?
क्या भर्ती प्रक्रिया में कोई अंदरूनी मिलीभगत थी?
क्या यह सिर्फ एक मामला है या किसी बड़े रैकेट का हिस्सा?
भर्ती घोटाले पर क्या होगी कार्रवाई?

BSF और पुलिस प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। अब देखना यह है कि इस भर्ती घोटाले में और कौन-कौन शामिल है और क्या बड़े अधिकारियों की भी इसमें संलिप्तता है?

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