REPORT TIMES : जिला एवं सेशन कोर्ट का एक बड़ा फैसला सामने आया है। सेना में कार्यरत जवान जयपाल सिंह को चार साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में दोषी पाते हुए 10 साल का कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह मामला वर्ष 2021 का है, जब गांव मझाऊ में बिजली का खंभा लगाने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था और जयपाल ने पड़ोसी युवक मनोज कुमार पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया था।

चार साल पुराना विवाद
28 जून 2021 की शाम का वक्त था। झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी थाना क्षेत्र के मझाऊ गांव में तेज आंधी आई और घरों के पास लगे एक बिजली के खंभे को गिरा दिया। खंभा टूटने से न केवल गांव की बिजली बाधित हुई, बल्कि गांववालों के लिए खतरा भी पैदा हो गया। इस पर बिजली विभाग की टीम नया खंभा लगाने के लिए मौके पर पहुंची।
इसी दौरान गांव का ही निवासी और सेना में कार्यरत जवान जयपाल सिंह वहां आ गया। जयपाल इस बात से नाराज था कि नया खंभा उसके घर के पास लगाया जा रहा है। उसने बिजली विभाग के कर्मचारियों को रोकने की कोशिश की और वहां मौजूद लोगों से बहस करने लगा।

तभी गांव के ही मोहनलाल का बेटा मनोज कुमार वहां पहुंचा और उसने जयपाल को समझाने का प्रयास किया। मनोज ने कहा कि यह काम गांव के भले के लिए है और बिजली विभाग केवल अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। लेकिन मनोज की ये बातें जयपाल को और भड़का गईं।
लोहे की रॉड से हमला, खून से लथपथ हुआ युवक
गुस्से से तमतमाए जयपाल ने अचानक पास में रखी लोहे की रॉड उठाई और मनोज के सिर पर जोरदार वार कर दिया। यह वार इतना खतरनाक था कि मनोज जमीन पर गिर पड़ा और खून से लथपथ हो गया। गांववालों ने उसे तुरंत उठाकर गुढ़ागौड़जी अस्पताल पहुंचाया।
हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने मनोज को सीकर रेफर कर दिया। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। जयपाल मौके से भाग निकला और कई दिनों तक फरार रहा।

पुलिस में मामला दर्ज, आरोपी की तलाश शुरू
मनोज के पिता मोहनलाल ने उसी दिन गुढ़ागौड़जी थाने में मामला दर्ज कराया। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि उनका बेटा केवल विवाद को शांत करने गया था, लेकिन पड़ोसी जवान ने जानलेवा हमला कर दिया।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और आरोपी की तलाश शुरू की। कई दिनों की मशक्कत के बाद पुलिस ने जयपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तफ्तीश पूरी कर अदालत में चालान पेश किया।
कोर्ट में चला लंबा मुकदमा
मामला अदालत में पहुंचने के बाद लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हुई। लोक अभियोजक रामावतार ढाका ने इस केस की पैरवी की और सरकार की ओर से पूरे मामले को मजबूती से रखा। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 21 गवाहों के बयान दर्ज कराए और करीब 20 दस्तावेज सबूत के तौर पर प्रस्तुत किए।
अदालत ने टिप्पणी की कि गांवों में छोटी-छोटी बातों पर हिंसा करना समाज में असुरक्षा फैलाता है। ऐसे मामलों में कठोर दंड ही समाज को संदेश दे सकता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
