जयपुर। रिपोर्ट टाइम्स।
राजस्थान में कांग्रेस शासन के दौरान बनाए गए 9 नए जिले और 3 संभागों को खत्म करने का फैसला राज्य सरकार ने शनिवार को लिया। इस फैसले के बाद राजस्व विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके तहत 31 दिसंबर तक जिले, तहसील और उपखंडों की सीमाओं में बदलाव की छूट दी गई है।
इसके बाद जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने के कारण किसी भी प्रकार के बदलाव पर रोक लग जाएगी। गहलोत सरकार के इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, और यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह निर्णय आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस निर्णय का असर न केवल प्रशासनिक कार्यों पर पड़ेगा, बल्कि स्थानीय राजनीति में भी नई उठापटक देखने को मिल सकती है।
राज्य में जिले और संभागों की संख्या में बदलाव
गहलोत सरकार द्वारा बनाए गए 9 नए जिलों की समाप्ति का निर्णय लिया गया है। इन जिलों में दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़, और सांचौर शामिल हैं। इन जिलों के साथ ही पाली, सीकर और बांसवाड़ा संभाग भी खत्म कर दिए गए हैं।
राजस्थान में पहले 50 जिले थे, लेकिन अब इन जिलों को समाप्त करने के बाद राज्य में केवल 41 जिले रह गए हैं। साथ ही, 10 संभागों की जगह अब सिर्फ 7 संभाग ही रह गए हैं। यह प्रशासनिक पुनर्गठन राज्य की राजनीति और प्रशासनिक कार्यों में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।
जयपुर के उपखंड, तहसील
उपखंड: जयपुर, सांगानेर, आमेर, बस्सी, चाकसू, जमवारामगढ़, चौमूं, सांभरलेक, माधोराजपुरा, रामपुरा डाबरी, किशनगढ़- रेनवाल, जोबनेर, शाहपुरा, फागी, दूदू और मौजमाबाद।
तहसील: मौजूमाबाद, दूदू, फागी, शाहपुरा, जोबनेर, किशनगढ़- रेनवाल, रामपुरा डाबड़ी, माधोराजपुरा, फुलेरा, चौंमू, आंधी, जमवारामगढ़, कोटखावदा, चाकसू, तूंगा, बस्सी, जालसू, सांगानेर, कालवाड़, आमेर और जयपुर तहसील शामिल है।
