रिपोर्ट टाइम्स।
राजस्थान में भजनलाल सरकार अपने दूसरे बजट की तैयारी कर रही है, लेकिन इससे पहले बड़ा सवाल यह है कि पिछले बजट की घोषणाओं का क्या हुआ? सरकार ने कई योजनाओं और विकास कार्यों का ऐलान किया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जहां कुछ जिलों में घोषणाएं पूरी हुईं, वहीं कई जगहों पर अब भी सिर्फ कागजी प्रक्रियाएं चल रही हैं। ऐसे में जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या नए बजट में पुरानी योजनाओं को पूरा करने का रोडमैप मिलेगा, या फिर सिर्फ नए वादों की झड़ी लगेगी?
सरकार की सफलता या पूर्ववर्ती सरकार का असर?
जयपुर, भीलवाड़ा, सीकर और बीकानेर जैसे कुछ जिलों में बजट घोषणाओं पर काम हुआ है। जयपुर में 7 करोड़ पौधे लगाए गए, बीकानेर में विकास प्राधिकरण का गठन हुआ, और सीकर में धोद को नगर पालिका का दर्जा मिला। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये घोषणाएं मौजूदा सरकार की दूरदर्शिता का नतीजा हैं, या फिर पिछली सरकार द्वारा तैयार की गई परियोजनाओं को ही आगे बढ़ाया गया?
कागजी प्रक्रिया में उलझीं घोषणाएं
47% जिलों में बजट घोषणाएं अभी भी टेंडर, डीपीआर और स्वीकृति प्रक्रिया में ही अटकी हुई हैं। कोटा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का काम सिर्फ फाइलों में चल रहा है, करौली में सेटेलाइट अस्पताल को हरी झंडी तो मिली लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हुईं, और बाड़मेर में 48 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं की घोषणा के बावजूद निर्माण कार्य ठप पड़ा है। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है, या फिर सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है?
बजट घोषणाएं सिर्फ चुनावी हथियार?
राजस्थान में हमेशा से यह देखा गया है कि बजट घोषणाएं चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए की जाती हैं। यह संयोग नहीं कि कुछ जिलों में काम तेजी से हुआ जबकि अन्य जिलों में योजनाएं अधर में लटकी हैं। चित्तौड़गढ़, नागौर, बूंदी, टोंक और सवाई माधोपुर जैसे जिलों में कोई भी बड़ी घोषणा पूरी नहीं हुई। क्या यह सिर्फ प्रशासनिक देरी है, या फिर यहां की राजनीतिक स्थिति इसकी वजह है?
नया बजट उम्मीदें पूरी करेगा या फिर सिर्फ सपने दिखाएगा?
अब जब भजनलाल सरकार दूसरा बजट पेश करने जा रही है, तो जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार घोषणाओं को जल्द से जल्द पूरा करने की ठोस योजना बनेगी? या फिर पिछली सरकारों की तरह यह भी सिर्फ कागजों में दौड़ने वाला बजट साबित होगा? विपक्ष पहले ही हमलावर हो चुका है और सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में देखना होगा कि यह बजट सरकार की साख बचाएगा या फिर जनता को सिर्फ आश्वासन ही मिलेगा।
