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बिजयनगर मामले में आरोपियों को वकीलों ने क्यों किया नकारा?

अजमेर। रिपोर्ट टाइम्स।

बिजयनगर ब्लैकमेल कांड के मामले में पीड़ित नाबालिगों ने अपनी दर्दनाक कहानी को अदालत में बयां करने के लिए कदम बढ़ाए। आज, इन बच्चियों की आंखों में भय और आक्रोश था, लेकिन साथ ही उनके दिलों में एक उम्मीद भी थी….न्याय की उम्मीद। जैसे ही ये बच्चियाँ अपने परिवार के साथ नसीराबाद कोर्ट पहुंचीं, उनके साथ थे उनके माता-पिता और रिश्तेदार, जो अपनी बच्चियों के साथ हुए इस घिनौने अपराध के खिलाफ न्याय की लड़ाई में पूरी तरह से खड़े थे। साथ ही, हिंदू संगठनों के पदाधिकारी भी सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर पहुंचे।

उनके संघर्ष को समर्थन देने के लिए कोर्ट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था, क्योंकि ये एक संवेदनशील और गंभीर मामला था। इन बच्चियों के बयान की अहमियत सिर्फ अदालत के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी थी….यह सवाल था कि क्या हम अपनी नाबालिगों को सुरक्षित रख पाएंगे?

वकीलों का पैरवी करने से इनकार

बिजयनगर बार एसोसिएशन ने नाबालिगों से जुड़े ब्लैकमेलिंग मामले की गंभीरता को समझते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया। उन्होंने निर्णय लिया है कि इस मामले में कोई भी वकील आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह एक ऐसा कदम था, जो न सिर्फ कानून की ताकत को दिखाता है, बल्कि समाज में न्याय के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है।

अजमेर न्यायालय में पेश होंगे आरोपी

पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से पांच बालिग हैं और दो नाबालिग हैं। बालिग आरोपियों को अजमेर न्यायालय में पेश किया जाएगा, जबकि नाबालिग आरोपियों को किशोर न्याय बोर्ड भेजा जाएगा। एडिशनल एसपी ब्यावर, भूपेंद्र शर्मा ने इस मामले में भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी। यह कदम न्याय की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण हिस्सा था, और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पुलिस पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

क्या था मामला

राजस्थान के अजमेर जिले में सोमवार को एक घिनौने अपराध की खबर सामने आई, जब एक स्कूली छात्रा को दोस्ती के बहाने ब्लैकमेल किया गया। छात्रा के पिता ने युवकों पर आरोप लगाया कि वे नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर उन्हें ब्लैकमेल कर रहे थे और धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहे थे। इसके बाद हिंदू संगठनों और लड़कियों के परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया और अन्य आरोपियों की तलाश शुरू की। पूछताछ में यह सामने आया कि आरोपियों ने अन्य लड़कियों को भी इस तरह के अपराध में शामिल करने की कोशिश की थी।

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