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मां की गोद में आई थी दुनिया, पुलिस के बूट तले चली गई जान

अलवर। रिपोर्ट टाइम्स।

न्याय की रक्षा करने वाली वर्दी कब क्रूरता का प्रतीक बन गई, किसी ने सोचा भी नहीं था। एक मां की गोद में खिलखिलाती मासूम, जिसने अभी ठीक से इस दुनिया को देखा भी नहीं था, वह सत्ता और सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी त्रासदी है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है।

राजस्थान के अलवर जिले में पुलिस की दबिश के दौरान एक महीने की मासूम बच्ची की संदिग्ध मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। परिवारवालों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों की लापरवाही ने उनकी नन्ही जान छीन ली, लेकिन जब उन्होंने इंसाफ की गुहार लगाई, तो उनकी आवाज़ें अनसुनी कर दी गईं। कोई कार्रवाई नहीं हुई, कोई जवाब नहीं मिला….बस मां की गोद सूनी हो गई और गांववालों के दिलों में आक्रोश भर गया।

आख़िरकार, जब गांववालों ने SP ऑफिस के बाहर धरना दिया, तब जाकर पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। लेकिन सवाल यह उठता है….क्या मासूम की जान जाने के बाद मिलने वाला न्याय वाकई न्याय कहलाता है? क्या एक महीने की बच्ची की मौत की जवाबदेही तय होगी, या फिर यह भी किसी फाइल में दबकर रह जाएगी?

पुलिस छापेमारी के दौरान एक महीने की बच्ची की मौत

राजस्थान के अलवर जिले में पुलिस की छापेमारी के दौरान एक महीने की मासूम बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। घटना नौंगावा थाना क्षेत्र के रघुनाथगढ़ गांव की है, जहां 2 मार्च की सुबह करीब 6 बजे साइबर ठगी के एक मामले की जांच के लिए दो जीपों में पुलिसकर्मी पहुंचे। पुलिस ने इमरान खान के घर में दबिश दी, जहां उनकी पत्नी रजीदा खान अपनी नवजात बच्ची अलीस्बा के साथ सो रही थी।

परिजनों का आरोप…पुलिसकर्मियों ने बच्ची पर रखा पैर

परिवारवालों का आरोप है कि छापेमारी के दौरान पुलिसकर्मियों ने बच्ची अलीस्बा पर पैर रख दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जब मां रजीदा खान ने अपनी बेटी को बचाने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का देकर घर से बाहर निकाल दिया। परिजनों का यह भी दावा है कि छापेमारी के दौरान कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी, जो कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।

इंसाफ की गुहार…धरने पर बैठे ग्रामीण

घटना के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक़, कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब पुलिस की बेरुखी जारी रही, तो गुस्साए ग्रामीणों ने अलवर SP (ग्रामीण) के आवास के बाहर धरना दिया और आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस विरोध के बाद अज्ञात पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और परिजनों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया।

‘मेरी बच्ची की हत्या हुई है, मुझे न्याय चाहिए’

मृतक बच्ची की मां रजीदा खान ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “जब मैं अपनी बच्ची के साथ खाट पर सो रही थी, तभी पुलिस अचानक घर में घुसी और मुझे जबरन बाहर निकाल दिया। उन्होंने मेरे पति को भी बाहर कर दिया। मेरी मासूम बेटी के सिर पर पैर रख दिया गया और उसे मार डाला। यह हत्या है और मुझे न्याय चाहिए।”

पुलिस टीम पर कार्रवाई, लेकिन क्या यह पर्याप्त है?

घटना में शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान हो गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस छापेमारी का नेतृत्व हेड कांस्टेबल गिरधारी और जगवीर कर रहे थे, जबकि टीम में कांस्टेबल सुनील, ऋषि और शाहिद भी शामिल थे। FIR दर्ज होने के बाद अलवर SP संजीव नैन ने इन पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन भेज दिया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी साइबर ठगी के एक मामले से जुड़ी थी, लेकिन इमरान खान के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं था। न ही किसी FIR में उनका नाम शामिल था। इमरान खान का आरोप है कि पुलिस ने उनके घर की तलाशी के दौरान उनका मोबाइल भी छीन लिया।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा

इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने इस घटना की निंदा की और राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा,
“अलवर में पुलिस आतंकवादियों जैसा व्यवहार कर रही है, लोगों को डराने का काम कर रही है। प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है।”

“BJP सरकार में राजस्थान की पहचान ‘अपराध युक्त’ प्रदेश के रूप में हो रही है। प्रदेश में जंगल राज और माफिया राज स्थापित हो गया है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं।”

FIR दर्ज, लेकिन क्या मिलेगा न्याय?

ASP तेजपाल सिंह ने पुष्टि की कि परिवार की लिखित शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच जारी है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या इस घटना में लापरवाह पुलिसकर्मियों को सख्त सजा मिलेगी, या फिर यह भी एक और अनसुलझा मामला बनकर रह जाएगा? क्या अलीस्बा की मौत को केवल एक ‘दुर्भाग्यपूर्ण हादसा’ मान लिया जाएगा, या फिर दोषियों को कठोर सजा देकर परिवार को न्याय मिलेगा?

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