उदयपुर। रिपोर्ट टाइम्स।
पूर्व सांसद व पूर्व मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य महेंद्र सिंह मेवाड़ के निधन के बाद अब उनके पुत्र विश्वराज सिंह मेवाड़ को परंपरानुसार राजगद्दी पर विराजने का दस्तूर पूरा किया जाएगा. इस कार्यक्रम का आयोजन 25 नवंबर को शाही परंपरा के अनुसार होगा. वहीं, मेवाड़ के 77वें महाराणा के रूप में विश्वराज सिंह का चित्तौड़ दुर्ग के फतेह प्रकाश महल में राजतिलक होगा. महाराणा विक्रमादित्य के राजतिलक के 493 साल बाद चित्तौड़ दुर्ग में मेवाड़ के महाराणा की गद्दी पर बैठने की परंपरा का निर्वहन होगा. इसको लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इस राजतिलक कार्यक्रम के हजारों लोग साक्षी बनेंगे.
मेवाड़ के सभी समाजों के हजारों लोग बनेंगे साक्षी : पूर्व महाराज रणधीर सिंह भींडर ने बताया कि करीब 40 साल बाद मेवाड़ की राजगद्दी के लिए महाराणा के राजतिलक की पंरपरा का निर्वहन होने जा रहा है. यह उत्सव मेवाड़ के सभी समाजजनों व साधु-संतों की मौजूदगी में होगा. इसमें मेवाड़ के सभी ठिकानेदार पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे. वहीं, विभिन्न राजपरिवारों के मुखिया भी इस कार्यक्रम में शरीक होंगे. इसके अलावा राजनीतिक, सांस्कृतिक, शिक्षा व अन्य क्षेत्रों के शख्सियत भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे.
जानें कैसे निभाई जाएगी राजतिलक की परंपरा : मेवाड़ के महाराणा की गद्दी पर बैठने के लिए राजतिलक का परंपरागत उत्सव होता है. वहीं, विश्वराज सिंह का आगामी 25 नवंबर को राजतिलक होगा. सोमवार को सुबह 10 बजे चित्तौड़ दुर्ग के फतह प्रकाश महल में इसका आयोजन होगा. राजतिलक परंपरा के अनुसार सलूंबर रावत देवव्रत सिंह राजतिलक की पंरपरा निभाएंगे. उसके बाद उमराव, बत्तीसा व अन्य सरदार के साथ ही सभी समाजों के प्रमुख लोग नजराना करेंगे. कार्यक्रम के बाद रैली के रूप में उदयपुर सिटी पैलेस में धूणी दर्शन होगा.
