प्रयागराज। रिपोर्ट टाइम्स।
साल की सभी अमावस्या में से मौनी और सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति पुण्य फलों की प्राप्ति होती है, ऐसे में ये जानना भी बहुत जरूरी है इस दिन स्नान के दौरान क्या नहीं करना चाहिए.
मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के नियम
- मौनी अमावस्या पर महाकुंभ का स्नान करने से पहले व्यक्ति को मन,वाणी और शरीर को पवित्र करने का संकल्प लेना चाहिए.
- स्नान के लिए पवित्र नदियों में सबसे पहले अपने हाथों में जल लेकर अर्पित करें और अपने सिर पर डाले उसके बाद ही संगम में प्रवेश करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, किसी भी पवित्र नदी में सीधे पैर नहीं डालना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति स्नान का पुण्य नहीं मिलता है.
- स्नान करने से पहले हाथ जोड़कर सूर्य देव को प्रणाम करें और डुबकी लगाते समय भगवान का ध्यान जरूर करें.
- संगम में स्नान के समय भक्तों को साबुन या शैंपू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से पवित्र जल अशुद्ध होता है. संगम में स्नान के दौरान पांच से कम डुबकी नहीं लगानी चाहिए.
- मान्यता है कि संगम में पांच डुबकी लगाने से ऐसा करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा आती है. साथ ही देवी-देवताओं, गुरुओं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कहते हैं जो लोग ऐसा नहीं करते उन्हें ये पुण्य नहीं मिलते हैं. स्नान करते समय श्रद्धा और मन की शुद्धता के साथ स्नान करें.
- नकारात्मक विचारों से दूर रहें. कहते हैं जो व्यक्ति ऐसा करता है उसे स्नान का पुण्य नहीं मिलता है.
