ये है प्राचीन रामसिंह का शिवालय। शहर की अरड़ावतिया कॉलोनी स्थित इस प्राचीन शिवालय की स्थापना 120 साल पहले विक्रमी संवत 1957 में सेठ रामसिंह जसरापुरिया ने की। शुरुआती दिनों में उन्होंने खुद ही यहां पूजा-अर्चना का जिम्मा सम्भाला। उनके अस्वस्थ होने पर रामरतन अरड़ावतिया ने पूजा का जिम्मा सम्भाला। इसके बाद ये ही पूजा करते रहे। बाद में इनके पुत्र बजरंगलाल अरड़ावतिया ने पूजा की और अब अंजनी अरड़ावतिया मंदिर में पुजारी हैं।
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इस प्राचीन शिवालय की खास बात ये है कि चिड़ावा शहर का यह सबसे बड़ा शिवलिंग है। नन्दी की भी बड़ी मूर्ति लगी है। वहीं कच्छप रूप में श्री हरि भी यहां विराजे हैं। भगवान आशुतोष पार्वती, गणेश, कार्तिकेय के साथ ही यहां हनुमानजी की मूर्ति भी स्थापित है। शिवालय में गौमाता भी निवास करती हैं। पीपल का पेड़ और प्राचीन कीर्ति स्तम्भ मंदिर की प्रतिष्ठा और धार्मिक महत्व को बढ़ा रहे है। एक बार अवश्य इस नयनाभिराम शिवालय के दर्शन कीजिए।
कल फिर एक नए शिवालय में मिलेंगे….हर हर महादेव
