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छात्रों के पलायन और शिक्षकों की कमी से जूझ रहा बिहार

बिहार के छात्र उच्च शिक्षा के लिए जहां यूक्रेन जा रहे हैं, वहीं राज्य के कॉलेजों में स्नातक विषयों में सीटें खाली रह जा रही हैं। विश्वविद्यालयों में बीए, बीएससी और बीकॉम में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। कहीं 50 तो कहीं 30 प्रतिशत सीटें खाली हैं। अगर सभी विवि में औसत की बातें करें तो 25 से 30 प्रतिशत स्नातक की सीटें खाली रह गई हैं। कोई ऐसा विविनहीं है, जहां शत-प्रतिशत नामांकन हुआ है। राज्य के विश्वविद्यालयों में सबसे कम सीटें पटना विश्वविद्यालय में हैं। यहां दाखिला लेना छात्रों की पहली पसंद है। कोरोना काल को छोड़ दिया जाए तो सत्र भी नियमित रहे हैं। बावजूद सभी सीटें नहीं भर सकी हैं। अन्य विश्वविद्यालयों के निजी कॉलेजों में भी ज्यादा सीटें खाली हैं।

राज्य से छात्रों का होता है पलायन
राज्य के मेधावी छात्रों का पलायन होता है। इस वजह से सीटें खाली रह जाती हैं। बिहार के छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय, बीएचयू, उत्तर प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों सहित दूसरे राज्यों में जाते हैं। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी इसका एक बड़ा कारण है।

मानविकी संकाय में ज्यादा सीटें खाली
सभी विश्वविद्यालयों में नामांकन के आंकड़ों को देखें तो बीए में मानविकी संकाय के विषयों में सीटें ज्यादा खाली हैं। विज्ञान विषय की सीटें अपेक्षाकृत कम खाली हैं। कुछ ऐसे विषय हैं, जिसे छात्र पसंद नहीं कर रहे हैं। पाली, प्राकृत, पर्सियन, संस्कृत, बंगाला, मगही, उर्दू, मैथिली, हिन्दी और अंग्रेजी विषयों में ज्यादा नामांकन नहीं है।

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