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लावारिश शवों की ऐसी दुगर्ति! अंतिम संस्कार के लिए कचरे की ट्रॉली में ले गए

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राजस्थान के सवाई माधोपुर से मानवीय संवेदनाओं को तार तार करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं. यहां लावारिश शवों के साथ दुगर्ति हो रही है. पहचान नहीं होने पर ऐसे शवों को अंतिम संस्कार के लिए कचरे की ट्रॉली में पटक कर ले जा रहा है. सोशल मीडिया में वायरल हो रही तस्वीरों में शवों के साथ इस तरह का सलूक नगर परिषद के कर्मचारी कर रहे हैं. इस तरह से शवों के साथ बेकद्री की घटना कोई पहली बार नहीं हुई है. बल्कि आए दिन शवों को इसी तरह से श्मशान ले जाया जाता है.

ताजा मामला ट्रेन की चपेट में एक युगल के शव का है. इस युगल की तीन दिन पहले ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी. जीआरपी ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार के लिए नगर परिषद के कर्मचारियों को सुपुर्द कर दिया. लेकिन नगर परिषद कर्मचारी शवों को उठाने के लिए कचरा ढोने वाली ट्रॉली लेकर आए. इसमें कर्मचारियों ने शवों को ऐसे उठाकर पटका, जैसे ट्रॉली में कोई सामान फेका गया हो. इसके बाद कर्मचारी शवों को लेकर श्मशान चले गए. जहां इन्हें जला दिया गया.

नगर निगम की है जिम्मेदारी

लोकल बॉडी मैन्यूअल के मुताबिक लावारिश शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संबंधित नगर परिषद की होती है. ऐसे में जब भी कहीं से कोई लावारिश शव बरामद होता है तो पुलिस या जीआरपी की टीम पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सुरक्षित कर लेती है. वहीं शवों को धार्मिक रीति रिवाज से अंतिम संस्कार के लिए नगर परिषद को सौंप दिया जाता है. फिर नगर परिषद की टीम शवों का नियमानुसार अंतिम संस्कार करती है.

स्पेशल होता है बजट

नगर परिषद के बजट में लावारिश शवों के अंतिम संस्कार के लिए अलग से बजट होता है. हालांकि साथ में यह भी व्यवस्स्था होती है कि साल के शुरू में आवंटित बजट कम हो जाए तो बाकी रकम मिसलेनियस खाते से वहन की जाती है. इसमें यदि शव किसी हिन्दू का है तो उसके कफन से लेकर पंडित तक का खर्चा होता है. इसी प्रकार मुस्लिम का शव होने पर दफन की पूरी प्रक्रिया तथा इसाई होने पर ताबूत तक का खर्च शामिल होता है.

विधायक ने की आलोचना

शवों के साथ बेकद्री का मामला सामने आने के बाद स्थानीय विधायक रामकेश मीणा ने नगर परिषद अधिकारियों को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा कि यह बहुत गलत बात है. मीणा ने कहा कि वह नगर परिषद के इस कृत्य से शर्मसार हैं. उन्होंने भरोसा दिया कि वह मामले की जांच कराएंगे और भरसक प्रयास करेंगे कि इस तरह की हरकत दोबारा ना हो. उधर, जीआरपी के अधिकारियों का कहना है कि अज्ञात शवों का पोस्टमार्टम के बाद नगर निगम के सुपुर्द कर दिया जाता है. आगे शव का क्या करना है, ये नगर परिषद का विषय है.

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