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‘चुनाव करवाने का मतलब यह नहीं कि हिंसा का लाइसेंस मिल गया’, चुनाव आयोग को SC की फटकार; सेंट्रल फोर्स तैनाती का फैसला बहाल

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पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में केंद्रीय बल की तैनाती के खिलाफ राज्य सरकार और बंगाल चुनाव आयोग की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि चुनाव प्रबंधन हिंसा का लाइसेंस नहीं देता है. न्यायमूर्ति नागरत्न ने कहा कि चुनाव कराने से हिंसा में लिप्त होने का लाइसेंस नहीं मिल जाता है. निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव और लोकतंत्र की विशेषताएं है. हिंसा के माहौल में चुनाव नहीं हो सकते हैं. इलके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी और इसके साथ ही केंद्रीय वाहिनी तैनाती की हाईकोर्ट के फैसले को बहाल रखा है. जस्टिस नागरत्न ने कहा कि हाई कोर्ट के 2013, 2018 के आदेशों का हिंसा का लंबा इतिहास रहा है. जस्टिस नागरत्न ने कहा कि हिंसा के माहौल में चुनाव नहीं हो सकते. चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र होने चाहिए. न्यायमूर्ति नागरत्न ने कहा कि अगर नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए स्वतंत्र नहीं लोगों की हत्या कर दी जाती है, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का कोई सवाल ही नहीं है. हिंसा की ऐसी घटनाओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने ऐसे आदेश दिए हैं. जस्टिस नागरत्न ने कहा, “आपने पांच राज्यों से पुलिस मांगी है और हाईकोर्ट ने केंद्रीय बलों को तैनात करने को कहा है. खर्चा केंद्र वहन करेगा. आपकी कठिनाइयां कहां हैं? इसके अलावा अगर केंद्रीय बल चुनाव में कानून-व्यवस्था के सवाल पर उलझे हैं तो इसमें दिक्कत कहां है?” राज्य के वकील ने कहा, “राज्य पुलिस काफी सक्षम है. पुलिस कर्मियों की कमी के चलते दूसरे राज्यों से पुलिस मांगी गई है. सारी तैयारी कर ली गई है. ऐसे में अगर केंद्रीय बलों की तैनाती करनी है तो योजना बदलनी होगी. चुनाव के सामने समस्या है.”

राज्य चुनाव आयोग ने कहा- किए गए हैं उचित उपाय

राज्य चुनाव आयोग के वकील ने कहा, “चुनाव की घोषणा के अगले दिन मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद नामांकन की प्रक्रिया चल रही है. नामांकन चरण में उचित उपाय किए गए हैं. नामांकन केंद्र से 1 किमी तक धारा 144 लागू कर दी गई है. राज्य पुलिस ने सहयोग किया है.” राज्य चुनाव आयोग ने कहा,” हम उस पर काम कर रहे थे. इसके अलावा, राज्य सुरक्षा के मुद्दे को देखता है. हाईकोर्ट ने आयोग को यहां सीधे केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश दिया है.” यह सुनने के बाद जस्टिस नागरत्न ने कहा, ‘अगर सुरक्षा व्यवस्था आप पर नहीं है तो आप केंद्रीय बलों की चिंता क्यों कर रहे हैं?’ अपना काम करो. आपकी समस्या कहां से है कि बल कहां से आ रहे हैं?” इसके बाद आयोग के वकील ने कहा, ”हम भी शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा की मांग करते हैं. लेकिन यहां हाई कोर्ट ने हमें केंद्रीय बलों की मांग करने का निर्देश दिया है. हम इसे कैसे करते हैं? यह हमारा काम नहीं है.” जस्टिस नागरत्न ने कहा, “मतदान में किसी तरह की गड़बड़ी की उम्मीद नहीं है. राज्य में पहले भी हिंसा की घटनाएं होती रही हैं. इस स्थिति में हाईकोर्ट ने स्थिति पर गौर किया और केंद्रीय बल दिया., मुझे वहां कोई समस्या नजर नहीं आती. ”

सुप्रीम कोर्ट में ममता सरकार को झटका, केंद्रीय वाहिनी तैनाती का फैसला बहाल

पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वास्तव में आज तक संवेदनशील इलाकों का सीमांकन नहीं किया गया है. यहां प्रत्येक जिले के लिए तैनाती है, चाहे वह संवेदनशील हो या नहीं, क्योंकि राज्य सरकार इसे संभालने के लिए तैयार नहीं है, न्यायमूर्ति बीवी नागरत्न ने कहा, “लेकिन आपके अनुसार आपके पास पुलिस बल पर्याप्त नहीं है, क्योंकि आपने आधा दर्जन राज्यों से मांग की है. 75,000 बूथ बनाए जाएंगे और आपने कहा है कि पुलिस बल की कमी के कारण आपने खुद अनुरोध किया है.” पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि 13 जून को राज्य चुनाव आयोग सुरक्षा की समीक्षा कर रहा था, लेकिन 15 जून को हाईकोर्ट ने 48 घंटे के भीतर अर्धसैनिक बलों की तैनाती का आदेश दिया. जस्टिस नागरत्न ने पूछा, अब वहां क्या स्थिति है? इसके जवाब में सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि आठ जुलाई को चुनाव होना है. नामांकन वापसी की आज आखिरी तारीख, 189 संवेदनशील बूथ हैं. इसके साथ जस्टिस ने राज्य चुनाव आयोग की याचिका को खारिज कर दिया. इससे हाईकोर्ट का सभी केंद्रों पर केंद्रीय वाहिनी की तैनाती का फैसला बहाल रहा.

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