जयपुर। रिपोर्ट टाइम्स।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जयपुर की पैरा-शूटर मोना अग्रवाल को उनके अद्वितीय खेल प्रदर्शन के लिए 2024 का अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया। मोना ने पेरिस पैरालंपिक में वीमेन R2 10 मीटर एयर राइफल SH1 में कांस्य पदक जीतकर न केवल अपने देश का नाम रोशन किया, बल्कि पैरा-शूटिंग की दुनिया में एक नई मिसाल भी कायम की। इससे पहले, 2024 में नई दिल्ली में आयोजित WSPS विश्व कप में मोना ने स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उनकी ये सफलता भारतीय खेल जगत में प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक विजेता
2024 के पेरिस पैरालंपिक में मोना अग्रवाल ने इतिहास रचते हुए वीमेन R2 10 मीटर एयर राइफल SH1 इवेंट में कांस्य पदक जीता। उनकी इस शानदार उपलब्धि ने न केवल भारतीय खेल जगत को गौरवान्वित किया, बल्कि उनके आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत को भी उजागर किया। इससे पहले, 2023 में क्रोएशिया के ओसिजेक में आयोजित डब्ल्यूएसपीएस विश्व कप में भी उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी कड़ी मेहनत का परिणाम देखा था।
संघर्ष भरा सफर
मोना अग्रवाल का करियर कभी आसान नहीं रहा। उन्होंने अपने सफर की शुरुआत में न तो उच्च स्तरीय उपकरण थे और न ही प्रशिक्षकों की सुविधा, फिर भी उनके मनोबल और मेहनत ने उन्हें सफलता की ओर बढ़ाया। पहले शॉटपुट, डिस्कस और जेवलिन थ्रो में रुचि रखने वाली मोना ने बाद में शूटिंग को अपने करियर के रूप में अपनाया और अपने कौशल को परिष्कृत किया।
व्यक्तिगत पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ उपलब्धि
मोना ने अपनी नौकरी और दो बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी के साथ यह सफलता हासिल की है। परिवार और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन मोना ने इसे अपनी ताकत बना लिया और इन दोनों मोर्चों पर सफलता प्राप्त की। उनके लिए यह सफलता किसी भी अन्य उपलब्धि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक संघर्ष भी जुड़ा है।
अर्जुन पुरस्कार पर गर्व का अहसास
अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करने के बाद मोना ने कहा, “यह पल मेरे और मेरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है। यह मेरे संघर्ष और मेहनत का परिणाम है। मैं अपनी इस उपलब्धि को उन सभी लोगों को समर्पित करती हूं, जिन्होंने मेरे सफर में मेरा साथ दिया।”
भारत की प्रेरणा बनीं मोना अग्रवाल
मोना अग्रवाल की सफलता सिर्फ खेल जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर महिला के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। उनका संघर्ष और सफलता भारतीय खेलों में एक मील का पत्थर साबित हुई है और वे आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।
