रिपोर्ट टाइम्स।
आज EPFO की अहम बैठक होने वाली है, ऐसे में खबर आ रही है कि इस बैठक में डिपॉजिट इंट्रेस्ट रेट में कटौती पर कोई निर्णय लिया जा सकता है. वहीं, प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को भी झटका लग सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्याज दर में कटौती की जा सकती है. इसकी वजह यह है कि स्टॉक मार्केट और बॉन्ड यील्ड से ईपीएफओ की कमाई में गिरावट आई है.
कब मिलेगा सबसे अधिक ब्याज
पिछली बार इसे बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत किया गया था. इससे पहले 2022-23 में पीएफ सब्सक्राइबर्स को 8.15 प्रतिशत की ब्याज दिया गया था. जो लोग प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे हैं उन लोगों की बेसिक सैलरी पर 12 प्रतिशत की कटौती ईपीएफ खाते के लिए की जाती है.इसके साथ ही कंपनी भी इतना ही पैसा कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करती है. ईपीएफओ के करीब 7 करोड़ सब्सक्राइबर हैं.
कुल वैल्यू 1.82 लाख करोड़ रुपए थी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक EPFO ने 2024-25 में 5.08 करोड़ से ज्यादा क्लेम निपटाए हैं. इन क्लेम की कुल राशि 2.05 करोड़ रुपए है. वहीं, 2023 -24 में 4.45 मिलिन क्लेम निपटाए गए थे, जिनकी कुल वैल्यू 1.82 लाख करोड़ रुपए थी. इसका मतलब यही हुआ कि अपने पीएफ अकाउंट से लोगों ने अधिक पैसा निकाला है.
1952-53 में ईपीएफओ की ब्याज दर 3 प्रतिशत था
बता दें, कि 1952-53 में ईपीएफओ की ब्याज दर 3 प्रतिशत था. जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए 1989-90 में यह 12 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यह अब तक का सबसे अधिक ब्याज दर था. वहीं साल 2000-2001 तक यही ब्याज दर रही. उसके बाद 2001-02 में यह घटकर 9.5 प्रतिशत हो गई. साल 2005-06 में यह गिरकर 8.5 प्रतिशत पर आ गई. यह 2021-22 में सबसे कम 8.10 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. एक साल पहले यानी वर्ष 2022-23 में 8.15% की ब्याज मिला था. सबसे अधिक ब्याज दर साल 1989-90 में दिया गया था.
