उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि मुझे मुफ्त में कोई भी चीज लेने की आदत नहीं है. मुझे चुनौतियां पसंद हैं. संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करना प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि यदि कोई अपराध आम जनमानस को झकझोरता है, तो उस पर पर्दा नहीं डाला जा सकता. अपराध का समाधान कानून के अनुसार ही होना चाहिए.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे गरिमापूर्ण और संवैधानिक पदों पर टिप्पणियां चिंतन और मनन का विषय है. उन्होंने कहा कि संविधान टकराव की नहीं, बल्कि संवाद, विचार-विमर्श और स्वस्थ बहस की अपेक्षा करता है. प्रजातंत्र की असली परिभाषा है अभिव्यक्ति और वाद-विवाद है. धनखड़ ने कहा कि मुझे न्यायपालिका के प्रति अत्यंत सम्मान है.

