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भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी की सजीव झांकी रही आकर्षण का केन्द्र

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चिड़ावा- जब मनुष्य अपने समस्त अभिमान को छोड़कर पूर्ण रूप से अपने को भगवान के समक्ष समर्पित कर देता है तब भगवान उसे अपना बना लेते है। असल में भगवान का एक नाम विवाह भी है। “विपक्षी वाहो वाहन यस्य” गरुड़ पक्षी जिसका वाहन है उसका नाम विवाह है। मन वचन कर्म से समर्पण के द्वारा भगवान को प्राप्त किया जा सकता है। उक्त कथन शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर शहर के निकटवर्ती गाँव सेही कला के नेत दादा मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ के पाँचवे दिन श्रीकृष्ण- रुक्मणी विवाह के प्रसंग के पर बोलते हुए कथा व्यास वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने
कहे।

तिवाड़ी ने भक्ति की वैज्ञानिक व्याख्या की। कथा से पूर्व डॉ जगदीश प्रसाद शर्मा व अरुण शर्मा ने सपत्निक भागवत व व्यास पूजन किया। इस दौरान सुरेश शेखावत द्वारा बसजाई गई भगवान श्री कृष्ण-रुक्मणी की सजीव झांकी आकर्षण का केंद्र रही । कथा के दौरान सुमधुर संगीत ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा में पूर्व सरपंच श्रीचंद पूनियां, शीशराम गोस्वामी
,जगदीश बड़सरा, विक्रम शर्मा, नत्थूराम शर्मा, पवन शर्मा, हरिसिंह बड़सरा, जयंत शर्मा, नत्थूराम शर्मा, सरदारा राम महरिया, गजानंद शर्मा, जयंत शर्मा, होशियार शर्मा, बुद्धिधर कुलहरी, सांवरमल नायक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरूष मौजूद रहे।

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