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जालंधर लोकसभा उपचुनाव : AAP की जीत तय! सुशील कुमार रिंकू 57 हजार वोटों से आगे

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जालंधर लोकसभा उपचुनाव के लिए वोटों को गिनती जारी है. अबतक के रुझानों से लगता है कि आम आदमी पार्टी यहां लोकसभा में अपना खाता खोल सकती है. पार्टी के उम्मीदवार सुशील कुमार रिंकू 57,000 से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं. ताजा अपडेट के मुताबिक अबतक 5.77 लाख वोटों की गिनती हो चुकी है. अभी तीन लाख से ज्यादा वोट की गिनती बाकी है.जालंधर सीट पर 16,21,800 रजिस्टर्ड वोटर्स हैं, जिसमें से 8,97,154 ने ही वोट डाले. इस तरह वोटर टर्नआउट 54.70% रहा. जिला प्रशासन ने शहर के कपूरथला रोड पर स्थित डायरेक्टर लैंड रिकॉर्ड स्टेट पटवार स्कूल और स्पोर्ट्स कॉलेज कैंपस में काउंटिंग सेंटर्स बनाए गए हैं. के लिए 9 राउंड में काउंटिंग की जाएगी. काउंटिंग के देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है. काउंटिंग सेंटर्स के आस-पास सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है. पैरामिलिट्री फोर्स और पंजाब पुलिस ने तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की है.डिप्टी कमिश्नर जसप्रीत सिंह ने कहा है कि वोटों की गिनती को ध्यान में रखते हुए सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं की गई हैं. उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन या चुनाव आयोग के जरिए जारी आवश्यक पहचान पत्र के बिना किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इससे मालूम चलता है कि सुरक्षा की क्या व्यवस्थाएं की गई हैं.

क्यों हुए उपचुनाव?

दरअसल, जालंधर में उपचुनाव इसलिए करवाए गए, क्योंकि कांग्रेस सांसद संतोख चौधरी की हार्ट अटैक की वजह से मौत हो गई थी. भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जब ये पंजाब में पहुंची, तो उस वक्त उन्होंने भी इसमें हिस्सा लिया. यात्रा में हिस्सा लेने के दौरान 14 जनवरी को हार्ट अटैक के चलते उनकी मौत हो गई.

किस पार्टी से किसे मिला टिकट?

जालंधर उपचुनाव में कुल मिलाकर 19 उम्मीदवार मैदान में हैं. इसमें 15 पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं. आम आदमी पार्टी ने सुशील कुमार रिंकू को मैदान में उतारा है. वहीं, कांग्रेस ने चौधरी परिवार पर ही भरोसा जताया है और संतोख की पत्नी करमजीत कौर को यहां से टिकट दिया है. एसएडी-बीएसपी की तरफ से सुखविंदर कुमार सुक्खी मैदान में हैं. अगर बीजेपी की बात करें, तो उन्होंने इंदर इकबाल सिंह अटवाल को टिकट दिया है.जालंधर उपचुनाव जीतने के लिए सभी पार्टियों ने 27 दिनों तक लगातार चुनाव प्रचार किया था. यह चुनावी लड़ाई सभी दलों के लिए प्रतिष्ठा के लिए बहुत अहम है, क्योंकि इससे राज्य में 2024 के आम चुनावों के लिए टोन सेट होने की संभावना है.

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