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सांचौर में क्या कांग्रेस के किले में सेंध लगा पाएगी बीजेपी?

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राजस्थान में सांचौर जिले की सांचौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. 1985 के बाद से सीट पर कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा है. सांचौर विधानसभा सीट पर 2018 के चुनाव में इस सीट से 14 उम्मीदवारों ताल ठोकी थी, लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी जीवाराम चौधरी के बीच देखने को मिला. 2018 के चुनाव में वर्तमान विधायक और कांग्रेस के उम्मीदवार सुखराम बिश्नोई ने कुल 84689 वोट हासिल किए थे. वहीं, BJP के दानाराम को 58771 वोट मिले. 2018 के विधानसभा चुनाव में कुल 227740 मतदाताओं ने वोट डाला था, इसमें 3209 वोट NOTA को पड़े थे. इसके अलावा सपा के उम्मीदवार रमेश कुमार ने भी 22496 वोट हासिल किए गए थे. राजस्थान में 23 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं जिसे लेकर पर चुनावी हलचल तेज हो गई है. राजस्थान की सियासत में सांचौर विधानसभा सीट काफी मायने रखती है. इस सीट से सुखराम बिश्नोई लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं. बिश्नोई जो गहलोत सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री बनने के बाद अब श्रम एवं कल्याण राज्य मंत्री हैं. 2008 के चुनाव में इस सीट से जीवाराम चौधरी निर्दलीय विधायक चुने गए थे. 2013 के बाद कांग्रेस से सुखराम बिश्नोई और 2018 में भी कांग्रेस के सुखराम बिश्नोई ने जीत दर्ज की.

सीट पर कितने वोटर और कितनी आबादी?

सांचौर विधानसभा सीट के मतदाताओं की बात करें तो 2018 के चुनाव में कुल 229761 मतदाता थे, इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 147388 थीं जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 132373 थी.

सीट का राजनीतिक इतिहास

सांचौर विधानसभा सीट के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो 1985 में कांग्रेस के रघुनाथ बिश्नोई, 1990 में भाजपा से लक्ष्मी चंद मेहता, 1993 में कांग्रेस से हीरालाल बिश्नोई, 1998 में हीरालाल बिश्नोई, 2003 में भाजपा से जीवाराम चौधरी, 2008 में निर्दलीय प्रत्याशी जीवाराम और 2013 और 2018 में से सुखराम बिश्नोई की जीत मिली चुकी है. सांचौर सीट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2018 में भाजपा ने सांचौर सीट गंवाई थी भाजपा की ओर से यहां दानाराम चौधरी के रूप में प्रत्याशी मैदान में उतार दिया था. टिकट नहीं मिलने पर बीजेपी के ही कैंडिडेट जीवाराम ने निर्दलीय के रूप में नामांकन भरा. नतीजा यह हुआ कि वोटों के विभाजन के बीच कांग्रेस के प्रत्याशी सुखराम बिश्नोई 25918 वोटों से जीत हासिल कर ली. बता दें कि जिले की पांच विधानसभा सीट में से केवल सांचौर एकमात्र सीट थी जिस पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, जबकि अन्य सीटों पर बीजेपी ही काबिज रही.

सीट पर जातीय समीकरण

विधानसभा क्षेत्र में ओबीसी वर्ग के कई समाज है जिसमे चौधरी (कलबी) बिश्नोई , माली, जाट, देवासी, राजपुरोहित, रावणा राजपूत, सुथार, घांची, राजपूत, भोमिया, समाज के लोग रहते हैं, जबकि एससी एसटी समाज में मेघवाल, भील, वाल्मीकि सरगरा सहित अन्य जातियां शामिल है. वहीं, जनरल वर्ग में राजपुरोहित, राजपूत भोमिया राजपूत, रावणा राजपूत समाज ब्राह्मण, राजपुरोहित शामिल हैं.

सांचौर का इतिहास

सांचौर राजस्थान का एक ऐतिहासिक कस्बा है. यह प्राचीन काल मे ‘सत्यपुर’ के नाम से जाना जाता था. प्राकृत ग्रंथों में इसे ,’सच्चउर’ कहा गया है. यहां वो कुआँ है जिससे जोधपुर महाराजा जसवंत सिंह के समय से पूरे सांचौर को मीठा पानी सप्लाई किया जाता था और इसका उल्लेख मारवाड़ इतिहास की विश्वसनीय और प्रसिद्ध पुस्तक मुहणोत नैनसी री ख्यात में मिलता है. सांचौर जिले में कुल चार उपखंड शामिल हैं, जिसमें सांचौर, बागोड़ा, चितलवाना, रानीवाड़ी शामिल है.

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