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मंत्री दिलावर पर भड़के डोटासरा, इंग्लिश मीडियम स्कूलों को बंद करने के पीछे ये सच्चाई

रिपोर्ट टाइम्स।

राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे फैसलों को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की समीक्षा के लिए गठित कमेटी ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यह फैसला राज्य की वर्तमान सरकार और विपक्षी नेताओं के बीच नए विवाद का कारण बन गया है।

महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल, जिनका उद्देश्य राज्य के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी शिक्षा उपलब्ध कराना था, अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि इन स्कूलों की समीक्षा के लिए एक साल तक इंतजार क्यों किया गया? उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करार देते हुए सरकार पर निष्क्रियता के आरोप लगाए हैं।

डोटासरा का आरोप…सरकार की नीयत पर सवाल

डोटासरा ने मदन दिलावर के बयानों को “अनर्गल” बताते हुए उनकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक साल से 17,192 पद खाली पड़े हैं, जिनमें 13,552 शिक्षक और 6,640 स्टाफ शामिल हैं। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 45,000 पदों की भर्ती की गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इन रिक्तियों को भरने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी नीयत साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों के मामले में सरकार खोटे इरादों के साथ काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा के शिक्षक नियुक्त करने की योजना बना रही है।

दूदू जिले के मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री पर तंज

डोटासरा ने उपमुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र दूदू को लेकर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री को पहले भी अपनी भूमिका से हटना पड़ा था और अब इस समीक्षा कमेटी के कारण उन्हें एक बार फिर पीछे हटना पड़ेगा। यह बयान राज्य की राजनीति में व्यक्तिगत टिप्पणियों को और तेज कर सकता है।

नई शिक्षा नीति .. इंग्लिश मीडियम का महत्व

डोटासरा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार की उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा सुधार किया। उन्होंने कहा कि हिंदी मीडियम स्कूलों के भी अच्छे परिणाम सामने आए थे, और इंग्लिश मीडियम स्कूलों के प्रति छात्रों और अभिभावकों में बड़ा उत्साह था।

डोटासरा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं को अनिवार्य किया गया है, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे सही ढंग से लागू नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में नामांकन में कमी आ रही है, और यह सरकार की असफलता का प्रतीक है।

मदन दिलावर का कांग्रेस पर पलटवार

इससे पहले, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस सरकार पर तीखे आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इंग्लिश मीडियम स्कूलों को लेकर छात्रों और अभिभावकों को धोखा दिया। दिलावर के अनुसार, कांग्रेस सरकार ने ना तो इन स्कूलों के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया, ना ही अंग्रेजी शिक्षकों की भर्ती की।

दिलावर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदलकर उन्हें बंद करने की साजिश रची। उन्होंने इसे कांग्रेस का दोहरा मापदंड बताया और कहा कि उनकी सरकार इन स्कूलों को बचाने और सुधारने के लिए काम कर रही है।

राजनीतिक माहौल … विवाद

महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को लेकर उठे इस विवाद ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। जहां कांग्रेस नेता सरकार पर शिक्षा क्षेत्र में लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं, वहीं सरकार कांग्रेस पर पिछली नीतियों में खामियों का ठीकरा फोड़ रही है।

यह स्पष्ट है कि इस मुद्दे ने शिक्षा के साथ-साथ राजनीति को भी केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों पक्ष इस बहस को किस दिशा में ले जाते हैं और इस विवाद का प्रदेश के शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।

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