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साथ की फोटो देखें। पहली तस्वीर प्रयागराज के कुरेसर घाट की है जो श्रृंग्वेरपुर से लगभग दस किलोमीटर दूर है। दूसरा चित्र श्रृंग्वेरपुर से दो किलोमीटर दूर गऊघाट का है और तीसरी फोटो में हम श्रृंग्वेरपुर का वह दृश्य देख रहे हैं जो एजेंडे के तहत 2021 में प्रचारित किया गया था। तीनों ही तस्वीरों में गंगा और उसके तट पर दफन मुर्दे दिख रहे हैं।
अब चलते हैं गऊघाट जहां टीले के ऊपर बने मंदिर में 40 वर्षों से अनवरत ‘सीताराम’ का जाप हो रहा है और नीचे बैठा है जुगनू नामक युवा चरवाहा जो हमें बता रहा है, ‘एक साल से इधर मुर्दे ज्यादा दफनाए जाने लगे हैं।’ …और उससे पहले?
