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चिड़ावा। राम के धनुष तोड़ने का समाचार अयोध्या में मिलते ही महाराज दशरथ और रानियां प्रसन्न हो उठी। दशरथजी भरत और शत्रुघ्न के साथ बारात लेकर रवाना हुए। ये दृश्य था साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश पचरंगिया मार्ग पर डालमियों के नोहरे में चल रही राम लीला के चौथे दिन का। इस दौरान साहित्यकार डॉ. ओमप्रकाश पचरंगिया के घर से बारात ठाठ बाट से निकली। ढोल, बाजों की धुन पर नाचते राजकुमार और गुरु वशिष्ठ के साथ दशरथ, राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और पुरवासी बारात लेकर रामलीला आयोजन स्थल पंहुचे। जहां पर सीता की माता और जनक ने परिवार सहित बारात का स्वागत किया। बारात को भोजन कराया गया।

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इसके बाद फेरे की रस्म निभाई गयी। इस मौके पर 7 वचनों के साथ आठवां वचन कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने और बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का संकल्प दिलाया गया। लीला में राम बने पंकज वर्मा, भरत बने नटवर कोतवाल, लक्ष्मण बने अनूप हर्षवाल, शत्रुघ्न बने ऋषिकेश कुमावत, दशरथ बने प्रियदर्शन जोशी, जनक बने मदनलाल जांगिड़, सीता बने सुनील महरानिया, वशिष्ठ बने प्रवीण पलड़िया, विश्वामित्र बने महेंद्र भारतीय, सतानन्द बने भूपेंद्र अरड़ावतिया, कैकयी बने रवि भारतीय, मंथरा बने ज्ञानशंकर पांडे आदि ने जोरदार अभिनय कर सभी का मन मोह लिया।

रामलीला परिषद अध्यक्ष प्रमोद अरड़ावतिया और कोषाध्यक्ष सुरेश डालमिया ने बताया कि रामलीला के दौरान कैकयी-मंथरा, कैकयी-दशरथ, और राम वन गमन प्रसंग की लीला दिखाई गई। परिषद सचिव सुशील पदमपुरिया ने बताया कि रामविवाह के उपलक्ष्य में रामलीला के कलाकारों को श्री विवेकानंद मित्र परिषद के सौजन्य से रोहिताश्व महला की ओर से प्रीतिभोज दिया गया। लीला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे है। रामलीला निर्देशक महेश धन्ना और किशोर कुमार नायक ने बताया कि रविवार को शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण, सुग्रीव मित्रता, बाली वध की लीला दिखाई जाएगी।
