Report Times
latestOtherटॉप न्यूज़ताजा खबरेंदौसाराजनीतिराजस्थानस्पेशल

पायलट जोन में 5 दिन राहुल की यात्रा, कितना रहेगा असर..क्या मोड़ लेगी गुर्जर राजनीति ?

REPORT TIMES

राजस्थान में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का आज 11वां दिन है जहां यात्रा दौसा जिले के लालसोट में 23 किलोमीटर का सफर पूरा करेगी. वहीं राहुल गांधी  यात्रा के 11वें दिन नांगल राजावतान मीणा हाईकोर्ट में रात्रि विश्राम करेंगे. इस बीच, भारत जोड़ो यात्रा के 16 दिसंबर को 100 दिन पूरे होने पर जयपुर के अल्बर्ट हॉल में सुनिधि चौहान का एक म्यूजिक इवेंट रखा गया है जिसमें राहुल गांधी सहित सभी यात्री और कांग्रेस के नेता शामिल होंगे. राहुल गांधी के कार्यक्रम के मुताबिक वह आज किसानों से भी मुलाकात करेंगे. मालूम हो कि राहुल गांधी की यात्रा सचिन पायलट और किरोड़ी लाल मीणा के प्रभाव वाले दौसा जिले में 5 दिनों तक रहेगी.

वहीं यात्रा के शुरू होने से ही पायलट हर दिन राहुल गांधी के साथ पैदल चल रहे हैं. हर दिन पायलट की कोई न कोई फोटो राहुल के साथ सोशल मीडिया पर चर्चा में रहती है जिसके कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं.

बता दें कि यात्रा फिलहाल जिन इलाकों में आगे बढ़ रही है वह खास तौर पर सचिन पायलट के वर्चस्व वाले इलाके हैं. बीते दिनों टोंक में यात्रा गुजरने के दौरान पायलट समर्थकों का जोश और उत्साह देखने को मिला था. मालूम हो कि सवाई माधोपुर से लेकर अलवर तक एरिया पायलट के गढ़ के रूप में मशहूर है और ज्यादातर क्षेत्रों में पायलट समर्थक विधायक हैं और यह गुर्जर-मीणा बाहुल्य क्षेत्र भी है.

दौसा में पायलट रखते हैं दम

राहुल की यात्रा ने टोंक में बहुत कम दूरी तय की जिसके बाद वह दौसा जिले में प्रवेश कर गई. दरअसल दौसा वही जिला हैं, जहां सचिन पायलट की मेहनत के चलते 2018 में सबसे ज्यादा सीटें कांग्रेस ने अपने कब्जे में की थी. वहीं इस क्षेत्र में कांग्रेस की इतनी सीटें आने के बाद ही गहलोत कैबिनेट में इलाके से लगभग दो तिहाई लोगों को मंत्री बनाया.

इसके अलावा दौसा जिले में सचिन पायलट का वर्चस्व किसी से छुपा नहीं है. एक जमाने में सचिन के पिता राजेश पायलट की यह कर्मभूमि रही है और वहीं पायलट की माता रमा पायलट भी यहां से सांसद रही है.

30 से 40 सीटों पर प्रभावी हैं गुर्जर वोटर्स

राजस्थान में जातिगत समीकरणों को देखें तो गुर्जर आबादी में 5 फीसदी का योगदान रखते हैं और विधानसभा की 30 से 40 सीटों पर हार-जीत का गणित गुर्जर वोटर्स तय करते आए हैं. इधर पायलट के 2018 के बाद उभार से कांग्रेस और बीजेपी में गुर्जर वोट बैंक को साधने की होड़ दिखाई देती है.

मालूम हो कि राजस्थान में गुर्जर समुदाय परंपरागत रूप से कांग्रेस का वोट बैंक रहा है लेकिन लोकसभा चुनाव में गुर्जर वोट कांग्रेस से टूट गया और बीजेपी ने सेंध लगा ली. वहीं पिछले चुनाव में राजस्थान में 13 विधायक गुर्जर जाति से जीते थे और 2018 के चुनावों में बीजेपी ने 9 गुर्जरों को टिकट दिए थे जिनमें से एक भी नहीं जीत पाया था और कांग्रेस से 7 प्रत्याशी जीत कर विधानसभा पहुंचे थे.

गुर्जर बहुल आबादी में पायलट का जलवा

इसके साथ ही राजस्थान में करौली, सवाई माधोपुर, जयपुर, टोंक, भरतपुर, दौसा, कोटा, धौलपुर, भीलवाड़ा, बूंदी और अजमेर जिलों में काफी संख्या में गुर्जर वोटर हैं जो चुनावों की दिशा तय करते हैं. वहीं बीते दिनों पायलट ने कई इलाकों का दौरा भी किया है और अब राहुल की यात्रा से एक संदेश दे रहे हैं. गौरतलब है कि राजस्थान में राजेश पायलट के उभार के बाद 80 के दशक से गुर्जर परंपरागत तौर पर कांग्रेस को वोट देते आ रहे हैं. हालांकि पिछले 4 सालों में राजस्थान में गुर्जर तबका कांग्रेस से इस बात से नाराज भी है कि 2018 में जीत के बाद सचिन पायलट को सूबे का मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया.

 

Related posts

हाजी अली दरगाह के लिए अक्षय कुमार ने दान किए 1 करोड़ 21 लाख रुपए, चादर भी चढ़ाई

Report Times

Saunf Benefits: डायबिटीज समेत इन बीमारियां को भी कंट्रोल करता है सौंफ

Report Times

जयपुर में रहस्यमयी खांसी ने बढ़ाई चिंता:उल्टियां भी हो रहीं; रोज आ रहे 700 मरीज, डॉक्टर बोले- केस और बढ़ेंगे

Report Times

Leave a Comment