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पेपर लीक के मास्टरमाइंड पहुंचे थाईलैंड, तस्करों ने करवाया बॉर्डर पार..वहीं की नए साल की पार्टी

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राजस्थान लोक सेवा आयोग की सैकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामले में राजस्थान सरकार एक्शन मोड में है. सरकार ने पेपर लीक में मास्टरमाइंड बताए जा रहे आरोपी सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण के कोचिंग सेंटर पर सोमवार को बुलडोजर चलवा दिया. वहीं आरोपियों के जयपुर में बने आलीशान बंगलों पर कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है. इधर दोनों ही आरोपी 19 दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है. वहीं दोनों आरोपियों के पहली बार नेपाल में होने की जानकारी सामने के बाद अब पता चला है कि मास्टरमाइंड सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण थाईलैंड पहुंच गए हैं. भास्कर की एक रिपोर्ट से पता चला है कि दोनों आरोपियों ने थाईलैंड में नए साल का जश्न भी मनाया. हालांकि पुलिस उनके घर और रिश्तेदारों के यहां दोनों की तलाश कर रही है. बताया जा रहा है कि ढाका और सारण नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार होते हुए थाईलैंड पहुंचे हैं.

बता दें कि दोनों आरोपी एक हफ्ते में जयपुर से हजारों किलोमीटर दूर निकल गए हैं और अब पता चला है कि अवैध रूप से थाईलैंड पहुंचने के बाद दोनों आरोपियों ने अपने करीबी दोस्तों को वीडियो कॉल कर थाईलैंड के नजारे भी दिखाए हैं.

पेपर लीक वाले दिन कार से हुए नेपाल रवाना

बताया जा रहा है कि सुरेश ढाका ने चित्रकूट स्थित अपने घर और गुर्जर की थड़ी पर बने अधिगम कोचिंग सेंटर पर एक कंट्रोल रूम बना रखा था जहां 24 दिसंबर को पेपर वाले दिन यहीं से दोनों उदयपुर में सुरेश बिश्नोई को डायरेक्शन दे रहे थे.

वहीं बिश्नोई के पकड़े जाने के बाद सुरेश ढाका ने पहले अपने साथियों को पुलिस से छुड़वाने की कोशिश की लेकिन समझौता नहीं होने पर दोनों ने उसी दिन जयपुर से नेपाल भागने का प्लान बनाया जिसके बाद शाम को करीब 6 से 7 बजे के बीच दोनों कार से नेपाल रवाना हो गए.

वहीं पता चला है कि सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण नेपाल में कई दिनों तक रहने और खाने-पीने के खर्च के लिए अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के एटीएम कार्ड तक साथ लेकर चले गए. रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आरोपी जयपुर से अलवर, आगरा, ग्वालियर, लखनऊ होते हुए करीब 13 से 14 घंटे का सफर तय कर नेपाल के काठमांडू पहुंचे जहां वह चार दिन तक रुके.

तस्करों की मदद से पहुंचे थाईलैंड

वहीं नेपाल के एक होटल में 4 दिन रूकने के बाद दोनों ने वहां से फरार होने की प्लानिंग बनाई लेकिन भूपेंद्र सारण के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से उसका पासपोर्ट नहीं बन सका. इसके बाद दोनों ने सड़क के रास्ते थाईलैंड जाने का सोचा और इसके बाद 29 दिसंबर को वह सड़क के रास्ते से बॉर्डर क्रॉस कर थाईलैंड पहुंच गए.बताया जा रहा है कि सुरेश ढाका नेपाल और बांग्लादेश के कई तस्करों को जानता था जिनकी मदद से दोनों ने बॉर्डर पार किया और इसके बाद वह बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार होते हुए थाईलैंड पहुंचे.

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