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पार्टी के भीतर रहकर ही लड़ाई तेज करेंगे सचिन पायलट! आलाकमान का रुख दे रहा संकेत

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जयपुर: कांग्रेस के लिए मंगलवार का दिन काफी अहम रहा जहां राहुल गांधी की सदस्यता जाने के बाद वह पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के दौरे पर थे वहीं दूसरी ओर राजस्थान में उनकी सरकार के पूर्व डिप्टी सीएम ने मोर्चा खोल दिया. राजस्थान में हुए घटनाक्रम ने हर छोटी-बड़ी घटना को दबा दिया जहां कांग्रेस आलाकमान के आदेश की अवहेलना करते हुए मंगलवार को सचिन पायलट अनशन पर बैठ गए. राज्य में चुनावों से पहले अपने वजूद की लड़ाई में पायलट की ओर से चला गया यह आखिरी दांव माना गया. वहीं पायलट के अनशन के बाद अब आलाकमान का रुख एक बार फिर नरम पड़ता हुआ दिख रहा है. दरअसल पायलट ने पिछली वसुंधरा राजे सरकार के दौरान हुए घोटालों में कथित एक्शन की मांग को लेकर 5 घंटे अनशन किया जहां वह अपने कुछ समर्थकों को लेकर मौन बैठे रहे. वहीं अनशन से पहले मुखर हुआ आलाकमान कल से अभी तक शांत है. वहीं अनशन खत्म करने के बाद पायलट देर रात दिल्ली पहुंच गए जहां आज शाम उनकी मुलाकात आलाकमान से हो सकती है. इसके अलावा पायलट की कई कांग्रेसी नेताओं से भी मुलाकात की खबरें हैं. इसके इतर पायलट ने अनशन खत्म करने के बाद करप्शन के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने का कहा जिससे साफ है कि वह भीतर रहकर ही अपना संघर्ष जारी रखेंगे. वहीं कांग्रेस आलाकमान की तरफ से पायलट को लेकर चुप्पी भी कई सियासी अटकलों को जन्म दे रही है. वहीं इस पूरे घटनाक्रम में अब प्रियंका गांधी का भी नाम तैरने लगा है.

आलाकमान हुआ पायलट पर नरम!

दरअसल पायलट को लेकर सुलह का रास्ता बनाए जाने को लेकर चर्चा इसलिए जोरों पर क्योंकि रविवार को भ्रष्टाचार को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ पायलट ने जो तेवर दिखाए थे वह अनशन खत्म करने के बाद उनमें काफी बदलाव आया है. वहीं अनशन के दौरान भी पायलट ने पूरी सावधानी बरती और किसी भी पार्टी विरोधी बयान और सीएम गहलोत के खिलाफ सधी हुई भाषा का इस्तेमाल किया. वहीं पायलट ने अडानी मुद्दे पर मोदी सरकार को भी घेरा.इसके अलावा अनशन के बाद इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पायलट ने पार्टी विरोधी कोई टिप्पणी नहीं की है जिस पर वह किसी भी तरह की कोई तत्काल प्रतिक्रिया दे सकें. मालूम हो कि इससे पहले रंधावा ने पायलट के अनशन से पहले एक बयान में कहा था कि पायलट का कल का अनशन पार्टी हितों के खिलाफ है और यह पार्टी विरोधी गतिविधि माना जाएगा.

प्रियंका गांधी की फिर हुई एंट्री!

वहीं पायलट के विवाद को लेकर एक बार फिर प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप करने की चर्चा हो रही है. बताया जा रहा है कि दिल्ली पहुंचने के बाद पायलट प्रियंका गांधी के संपर्क में है. मालूम हो कि 2020 में हुई पायलट की बगावत के दौरान भी प्रियंका गांधी ने ही समझौते का प्रारुप तैयार किया था. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आलाकमान के पायलट को लेकर नरम रुख के पीछे गांधी परिवार का क्या स्टैंड है.

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