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आर्मी कैप्टन को सैन्य सम्मान से दी अंतिम विदाई:कंमाडो ट्रेनिंग में हड्डी क्रेक होने से कोमा में थे, महीनों से चल रहा था इलाज

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कमांडो ट्रेनिंग के दौरान कोमा में जाने से सीकर के रहने वाले कैप्टन का निधन हो गया। उनका एक महीने तक बेंगलुरु में इलाज चला। उसके बाद पुणे लेकर आए। वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। कैप्टन का आज सैन्य सम्मान से सीकर में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना के कई अधिकारी, उप जिला प्रमुख ताराचंद धायल, सीआई पवन कुमार चौबे, रतनलाल सैनी, विजय सैनी सहित सैकड़ों शहरवासी मौजूद रहे।

सीकर के रहने वाले कैप्टन जाग्रत कौशिक के ताऊजी सुधीर कौशिक ने बताया कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद जाग्रत ने एक मल्टीनेशनल कंपनी में 6 महीने तक नौकरी की थी। सेना में साल 2019 में सीधे लेफ्टिनेंट के पद पर नौकरी लग गए।

लेफ्टिनेंट के बाद पहला प्रमोशन कैप्टन के रूप में मिला। वे जम्मू कश्मीर रेजिमेंट में तैनात थे। उनकी पोस्टिंग पहले सियाचिन बॉर्डर पर थी। इसके बाद उत्तराखंड के बनवासा में गए। वहां से जाग्रत कमांडो की ट्रेनिंग के लिए सिलेक्ट हो गए थे।

पुणे में ली अंतिम सांस

कैप्टन कमांडो की ट्रेनिंग के लिए बेंगलुरु के पास बेलगाम गए। ट्रेनिंग के दौरान 19 दिसंबर 2022 को उनके सिर के पीछे की तरफ की हड्डी क्रेक होने के चलते वे कोमा में चले गए। करीब एक महीने तक उनका बेंगलुरु में इलाज चला। इसके बाद एयरलिफ्ट कर पुणे रेफर किए गए, जहां शुक्रवार को उनका निधन हो गया।

बड़ा भाई आर्मी इंटेलिजेंस में तैनात

कैप्टन के पिता हरित कौशिक वर्तमान में अंबुजा सीमेंट के नागौर जिले के मारवाड़ मूंडवा ऑफिस में नौकरी कर रहे हैं। मां हाउस वाइफ है। उनका बड़ा भाई सुर्भित भी आर्मी इंटेलिजेंस में तैनात है, जो दिल्ली एयरपोर्ट पर पोस्टेड है।

अक्टूबर में छुट्टी आए,गेम्स के चलते बीच में चले गए

कैप्टन जाग्रत कौशिक अक्टूबर 2022 में 15 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। इसी दौरान इंटरनल गेम होने थे। ऐसे में बीच छुट्टी ही वापस चल गया। दोनों भाइयों ने नौकरी के चलते घरवालों को कुछ समय तक शादी के लिए भी मना कर दिया था।

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