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अखिलेश को झटका देने के मूड में सपा के दो बड़े नेता, थामेंगे बीजेपी का दामन

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अगले हफ्ते समाजवादी पार्टी के दो बड़े नेता बीजेपी में शामिल होने का मन बना चुके हैं. बीजेपी की तैयारी अगले लोकसभा चुनाव तक हर महीने अखिलेश यादव के कैंप में सेंध लगाने की है. पार्टी की तरफ से यूपी के चार बड़े नेताओं को अखिलेश के लोगों को तोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है. समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर आए ओम प्रकाश राजभर भी इस मिशन में लगे हुए हैं. इसी महीने विधायक और पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. बीजेपी के एक राष्ट्रीय महासचिव का दावा है कि अखिलेश यादव की पार्टी के चौदह विधायक उनके संपर्क में हैं. इनमें से अधिकतर पिछड़ी जाति और दलित समाज के हैं. बीजेपी की कोशिश ये माहौल बनाने की है कि समाजवादी पार्टी में भगदड़ मची है. पार्टी ये साबित करना चाहती है कि समाजवादी पार्टी एक डूबता हुआ जहाज है. अगले चार-पांच दिनों में समाजवादी पार्टी के दो विधायक पाला बदलकर बीजेपी में आने वाले हैं. इनमें पहला नाम इंद्रजीत सरोज का है. वे कौशांबी जिले के मंझनपुर से विधायक हैं. वे चौथी बार विधायक बने हैं. कभी मायावती के करीबी रहे इंद्रजीत सरोज अभी अखिलेश यादव के करीबी हैं. दलितों में पासी बिरादरी के सरोज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं. प्रयागराज और आस पास के जिलों में पासी समाज में उनकी अच्छी पकड़ है. बीएसपी के संस्थापक कांशीराम से राजनीति की ट्रेनिंग लेने वाले सरोज की मायावती से नहीं बनी. उनकी सरकार में मंत्री रहे सरोज साल 2018 में बीएसपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में आए और बीजेपी का दामन थामने की तैयारी है.

पूजा पाल का सपा से होने लगा मोहभंग

समाजवादी पार्टी से ही एक और विधायक पूजा पाल का भी पार्टी से मोहभंग हो गया है. अपने पति राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह उमेश पाल के मर्डर के बाद से ही वे अखिलेश यादव से नाराज चल रही हैं. उमेश पाल की हत्या अतीक और उसके साथियों ने की थी. समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने इस मामले में अतीक अहमद का बचाव किया था, जबकि पूजा पाल के विधायक पति राजू पाल की हत्या का आरोप भी अतीक अहमद और उसके गैंग पर लगा था. पूजा पाल के पति राजू पाल तब इलाहाबाद पश्चिमी सीट से बीएसपी के विधायक थे. 16 जनवरी 2005 के दोनों की शादी हुई थी. शादी के नौ दिनों बाद ही प्रयागराज में दिन दहाड़े राजू पाल की हत्या कर दी गई. इस मर्डर में माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का नाम सामने आया. उन दिनों अतीक फूलपुर से लोकसभा का सांसद था. राजू पाल ने उसके छोटे भाई अशरफ को चुनाव में हराया था. इसी बात पर राजू को मार दिया गया.

इंद्रजीत सरोज और पूजा पाल को देना विधानसभा से इस्तीफा!

बाद में पूजा पाल इलाहाबाद पश्चिम सीट से दो बार विधायक चुनी गईं. दोनों बार वे बीएसपी के टिकट पर चुनाव जीतने में कामयाब रहीं. फिर जब अतीक अहमद का परिवार बीएसपी में आ गया तो पूजा पाल बीएसपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं. 2022 का विधानसभा चुनाव वे कौशांबी जिले की चायल सीट से लड़ीं और जीत भी गईं. उमेश पाल शूट आउट कांड के बाद से ही पूजा समाजवादी पार्टी से निकलने का बहाना ढूंढ रही थीं. समाजवादी पार्टी के नेताओं की अतीक और उसके परिवार से हमदर्दी ने उन्हें परेशान कर रखा था. अपने पति के हत्यारों के लिए आंसू बहाने वालों का साथ उन्हें नामंजूर है. पूजा भी पिछड़ी बिरादरी की हैं. अगले लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी का पूरा फोकस दलितों और पिछड़ों पर है. बीजेपी के सूत्रों की मानें तो किसी भी दिन पूजा पाल और इंद्रजीत सरोज की बीजेपी में आने की घोषणा हो सकती है. ऐसे में इन दोनों को विधानसभा से इस्तीफा देना होगा.

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