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अपनी चोट से गहलोत ने राठौड़ को सिखाई डेमोक्रेसी, वो कसते रहे तंज और हाथ जोड़ बैठे रहे नेता प्रतिपक्ष

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राजस्थान में चुनावी माहौल है. नेता गंभीर हैं. लेकिन लोकतंत्र की खूबसूरती है कि छींटाकशी के इस राजनीतिक दौर में भी नेताओं के बीच हंसी चकल्लस हो ही जाता है. ऐसा ही हुआ राजस्थान में भी, जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ एक मंच पर ‘फंस’ गए. मौका था विधायकों के लिए बने 160 फ्लैट्स के लोकार्पण का. गहलोत के हाथ में माइक था. तो उन्होंने अपनी पूरी नाराजगी और पिछले दिनों उनकी चोट पर हुए कटाक्ष का पलटवार खरी-खरी बोली में कर दिया. वो भी नेता प्रतिपक्ष को डेमोक्रेसी यानी लोकतंत्र का पाठ पढ़ाते हुए. अपने संबोधन की शुरुआत में ही गहलोत ने तंज कसते हुए कहा, ‘मैं शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करने के लिए नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का धन्यवाद करता हूं, लेकिन लोकतंत्र में तो नेता प्रतिपक्ष को हाल-चाल लेने के लिए तो मेरे घर आना चाहिए था.’ अब तंज कसा है तो शिकायत भी की जाए. तो गहलोत ने शिकायती लहजे में आगे कहा, ‘घर आकर पूछने की जगह आपने और आपकी पार्टी ने मेरी चोट का मजाक बना दिया.’ गहलोत यहीं नहीं रुके और नेता प्रतिपक्ष को संबोधित करते हुए अपनी चोट के बारे में विस्तार से बताने लगे. बताते-बताते गहलोत ने एक और तंज कस दिया कि उन्हें डाउट है कि राठौड़ साहब को अब भी उनकी चोट पर डाउट हो रहा है. जब सिकवे-शिकायत दूर हो ही रहे थे तो गहलोत ने राठौड़ को अपनी पुरानी शिकायत भी सुना दी.

राठौड़ के भतीजे की शादी में क्यों नहीं गए गहलोत

उन्होंने कहा, राजेंद्र राठौड़ जब नेता प्रतिपक्ष नहीं थे, तब अपनी भतीजे की शादी का कार्ड देने के लिए एक बार मेरे घर आए. मैंने कहा कि राठौड़ साहब आए हैं, चाय वगैरह बनाई जाए, राठौड़ साहब से गपशप की जाएगी. लेकिन ये भाई (राठौड़) कोई छिप कर आया हो जैसे, उस ढंग से आया. मैं कार्ड पढ़ता, दूल्हा दुल्हन का नाम वगैरह पूछता तब तक इन्होंने कहा कि नमस्कार साहब और भाग गए. मैं इसी कारण शादी में नहीं गया. सिर्फ इसलिए क्योंकि राठौड़ साहब ने जिस तरीके से निमंत्रण दिया, ये कोई निमंत्रण होता है क्या. यहां अपने राजनीतिक अनुभव से गहलोत ने राठौड़ को फिर से लोकतंत्र और राजनीति का पाठ पढ़ाया. उन्होंने कहा कि अगर आप ऐसा नहीं करते तो मैं भी शादी में आता और आपके भतीजे को आशीर्वाद देता. इससे आपका भी कद परिवार में बढ़ता कि हमारे अंकल के कारण मुख्यमंत्री शादी में शामिल हुए, लेकिन राठौड़ साहब आप ऐसा करने से चूक गए. मजाक-मजाक में कसे गए गहलोत के इन तंज के जवा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ बस हाथ जोड़कर हंसते रहे. इस दौरान मंच पर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी, UDH मंत्री शांति धारीवाल भी मौजूद रहे.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को चेतावनी दी कि वे आत्मसमर्पण कर दें नहीं तो लड़ाई का परिणाम तय है और दो वर्ष में नक्सलवाद को समाप्त कर दिया जाएगा. शाह नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे. सुरक्षाबलों ने 16 अप्रैल को कांकेर जिले में एक मुठभेड़ के दौरान 29 नक्सलियों को मार गिराया था, जिसमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं. शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, पिछले 10 वर्षों के दौरान नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को समाप्त किया। मोदी जी ने इस देश से नक्सलवाद को समाप्ति के कगार पर ला दिया. उन्होंने कहा, पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में नक्सलियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. विष्णु देव साय के मुख्यमंत्री और विजय शर्मा के गृह मंत्री बननेके बाद पिछले चार माह में सुरक्षाबलों ने 90 से ज्यादा नक्सलवादियों को मार गिराया. इसके साथ ही 123 नकस्लियों को गिरफ्तार किया गया और 250 ने आत्मसमर्पण कर दिया. देश भर से नक्सलवाद को समाप्त किया अमित शाह ने कहा, मोदी जी ने देश भर से नक्सलवाद को समाप्त किया चाहे वह आंध्रप्रदेश हो, तेलंगाना हो, बिहार बिहार हो, झारखंड हो या मध्य प्रदेश हो. मैं कहकर जाता हूं कि मोदी जी को फिर से प्रधानमंत्री बना दीजिए और दो साल दे दीजिए. छत्तीसगढ़ से हम नक्सलवाद को उखाड़ फेंकेंगे. गृह मंत्री ने कहा, जब तक नक्सलवाद है तब तक आदिवासी भाई बहनों के लिए बिजली, स्कूल, राशन की दुकान देने में परेशानी हो रही है. जो भी नक्सली बचे हैं उनको कहता हूं कि सरेंडर हो जाओ, आपको फिर से प्रतिस्थापित करेंगे नहीं तो लड़ाई का परिणाम तय है. नक्सलवाद को हम समाप्त कर देंगे. नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए समझाएं शाह ने सभा में मौजूद जनता से अनुरोध किया कि वे नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए समझाएं. उन्होंने कहा, मैं आदिवासी भाइयों और बहनों से कह रहा हूं कि जब तक नक्सलवाद है आदिवासी क्षेत्र में शांति नहीं हो सकती, रोड नहीं बन सकता, बिजली नहीं पहुंच सकती, गैस कनेक्शन नहीं आ सकता, शिक्षा नहीं पहुंच सकती, नौकरी नहीं पहुंच सकती और इलाज नहीं पहुंच सकता है. शाह ने कहा कि आप सभी लोग उनको समझाइए सरेंडर कर जाएं, ना करें तो आप चिंता मत करना, हम दो ही साल में छत्तीसगढ़ की भूमि से नक्सलवाद को उखाड़ कर फेंक देंगे और यहां विकास की गंगा प्रवाहित करेंगे. Read Also : अमित शाह ने कटिहार से भरी हुंकार, कांग्रेस और राजद पर बोला हमला, जानिए लालू-तेजस्वी के लिए क्या कहा.. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 2037 में विकसित भारत की कल्पना रखी है. विकसित भारत का सबसे बड़ा फायदा आदिवासी, दलित, किसान, युवा, गरीब और महिलाओं को होने वाला है। विकसित भारत की कल्पना आप सभी के कल्याण के लिए है. शाह ने कहा कि कांग्रेस कहती है कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है लेकिन हम (भाजपा) कहते हैं कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों का है.

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