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अमेरिका से 1 लाख भारतीयों को निकाला जा सकता है बाहर, ट्रंप के बेटे पर भी खतरा

नई दिल्ली. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय प्रवासियों के करीब 1 लाख बच्चों को नागरिकता के अभाव में डिपोर्ट किए जाने का मुद्दा एक बार फिर जोर-शोर से उठा है। यह वे बच्चे हैं जो अमेरिका में पैदा नहीं हुए, बल्कि एक बच्चे के रूप में अपने प्रवासी मां-बाप के साथ अमेरिका पहुंचे थे। लेकिन अब 21 साल से ज्यादा होने पर वे एक वयस्क के रूप में अमेरिका के अवैध नागरिक हो जाएंगे और उन्हें खुद को ऐसी जगह डिपोर्ट करना होगा, जहां उनको शायद कोई नहीं जानता। ऐसे समय में जब अमेरीका के चुनाव में अवैध प्रवासी मुख्य चुनावी मुद्दा बन चुके हैं, अमेरिका में नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के ताजा सर्वे के मुताबिक अमेरिका में वैध रूप से आए प्रवासियों के करीब 2 लाख 50 हजार बच्चों के सामने 21 साल से ज्यादा होने के कारण डिपोर्ट होने का खतरा है, जिनमें करीब 40 फीसदी बच्चे भारतीय प्रवासियों के हैं, जो कि EB-1, EB-2 और EB-3 श्रेणी में अमरीका के ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। प्रवासियों के लिए काम करने वाली संस्था इम्प्रूव द ड्रीम के प्रतिनिधियों ने पिछले ही महीने इन बच्चों को ग्रीन कार्ड दिए जाने का मुद्दे को लेकर 100 से ज्यादा सांसदों के कार्यालयों में जाकर उनसे मुलाकात की है।

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति उम्मीदवार ट्रंप और वेंस के बच्चे भी ‘बाहरी:

अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अवैध प्रवासियों को वापस भेजने को मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है। ट्रंप की पार्टी का विवादित प्रोजेक्ट 2025 इसी बारे में हैं। ट्रंप की पार्टी के लिए यह मुद्दा कितना अहम है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि रिपब्लिकन पार्टी के नेशनल कन्वेंशन में वीपी दावेदार बनाए गए जेडी वैंस की भारतीय मूल की पत्नी उषा चिलुकुरी के संबोधन के दौरान भी वहां पर ‘सेंड देम बैक’ के नारे गूंज रहे थे। गौरतलब है कि खुद ट्रंप की तीसरी और मौजूदा पत्नी मेलानिया ट्रंप भी स्लोवाकिया मूल की हैं, और तत्कालीन यूगोस्लाविया में पैदा हुई थीं।

वयस्क होने से पहले ग्रीन कार्ड जरूरी:

अमेरिका के द इमीग्रेशन एंड नेशनेलिटी अधिनियम के अनुसार, 21 साल से कम के व्यक्ति को बच्चा माना जाता है। लेकिन अमरीका के बाहर पैदा हुआ कोई बच्चा अगर 21 साल का होने तक ग्रीन कार्ड हासिल नहीं कर पाता है, तो वह कानून की नजर में अवैध नागरिक हो जाता है। ग्रीन कार्ड के लिए आवेदकों की लंबी लाइन होने और ग्रीन कार्ड के लिए कोटा आधारित प्रणाली होने के कारण मौजूदा प्रणाली में यह संभव नहीं है कि सभी वैध प्रवासियों की अमरीका के बाहर पैदा हुईं संतानों को 21 साल से पहले ग्रीन कार्ड दिया जाए। इसके लिए पिछले दिनों अमरीका की संसद में दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच सहमति बनी थी, पर उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। गौरतलब है कि अमरीका में करीब 11.20 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड के लिए लाइन में हैं।

गतिरोध के लिए रिपब्लिकन पार्टी जिम्मेदार- व्हाइट हाउस:

व्हाइट हाउस की प्रेस प्रवक्ता ने इसी सप्ताह एक प्रेस कॉनफ्रेंस में कहा है कि सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दलों में इस बारे में एक सहमति बनी थी, जिसमें इन प्रवासियों की संतानों को राहत दिया जाना था। जैसा कि मैंने पहले भी इस मंच से बताया कि प्रतिनिधि सभा में इस संबंध में जरूरी कानून पर मतदान के दौरान रिपब्लिकन पार्टी ने दो बार इसे खारिज कर दिया।

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