रिपोर्ट टाइम्स।
काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र रूप कहा जाता है. कहा जाता है कि मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान काल भैरव का अवतरण हुआ था. इस साल 22 नवंबर, शुक्रवार को काल भैरव जयंती मनाई जाएगी. मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि विधान से पूजा करने से व्यक्ति को सभी दुख-दर्द, नकारात्मकता और भय से मुक्ति मिलती है.
काल भैरव जयंती पूजा शुभ मुहूर्त
काल भैरव जंतती के दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट से लेकर सुबह 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में पूजा करने से व्यक्ति के घर में सुख- शांति के साथ समृद्धि आती है.
काल भैरव जयंति का महत्व
मान्यता है कि भगवान काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को भय मुक्ति मिलती है. काल भैरव जिन पर प्रसन्न होते है.उन्हें कभी नकारात्मक शक्तियों, ऊपरी बाधा और भूत-प्रेत जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती.काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है, इनकी पूजा के बिना भगवान विश्वनाथ की आराधना अधूरी मानी जाती है.
काल भैरव पूजन विधि
- कालाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ हो जाएं.
- फिर साफ कपड़ पहनकर व्रत का संकल्प लें,
- संकल्प लेते समय ‘ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः’ का जाप करें.
- इसके बाद काल भैरव की सामान्य रूप से पूजा करें.
- अर्धरात्रि में धूप, काले तिल, दीपक, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करें.
- व्रत के पूरा होने के बाद काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं.
