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“जो बाथरूम में कॉकरोच से डरते हैं वो SP-कलेक्टर बनते हैं”, ये क्या बोल गए पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा

नवलगढ़। रिपोर्ट टाइम्स।

अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रहने वाले पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा एक बार फिर चर्चा का विषय बने हैं। रविवार को नवलगढ़ के गोठड़ा में आयोजित श्री सीमेंट प्लांट पर किसान सभा में उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और उनके साहस को लेकर एक विवादित बयान दिया। इस बयान में गुढ़ा ने कहा कि जो लोग बाथरूम में कॉकरोच से डरते हैं, वही थानेदार, कलेक्टर और एसपी बनते हैं।

वहीं, सांप के बिल में हाथ देने वालों का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने कहा कि वे दसवीं में ही फेल हो जाते हैं। उनके इस बयान ने सभा में उपस्थित लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हलचल मचा दी। गुढ़ा के इस बयान पर प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है, और उनकी बातों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को और तेज कर दिया है।

एसडीएम से अनुमति न मिलने पर तीखी प्रतिक्रिया

पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने रविवार को गोठड़ा में सीमेंट कंपनी के सामने किसानों के प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी। जब एसडीएम ने कंपनी के 300 मीटर दायरे में सभा की अनुमति नहीं दी, तो गुढ़ा ने इस पर गुस्सा जताया।

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास किया, और यह उस प्रकार का तानाशाही रवैया था, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके इस बयान से प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं के बीच बहस शुरू हो गई है, और बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।

पुलिस प्रशासन से भिड़े गुढ़ा: स्थिति नियंत्रण में

सभा के दौरान गुढ़ा और पुलिस प्रशासन के बीच भी तनातनी बढ़ गई। गुढ़ा ने पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे किसानों की आवाज को दबाने के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने सूझबूझ से काम लिया और स्थिति को नियंत्रण में रखा। गुढ़ा के साथ हुए इस टकराव के बावजूद पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से सभा को खत्म करने का प्रयास किया।

किसानों की 23 सूत्रीय मांगें..मुआवजा और रोजगार की बात

किसान श्री सीमेंट कंपनी के सामने मुआवजे, स्थानीय लोगों को रोजगार और 23 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। कंपनी के अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को सुलझाने के लिए 26 जनवरी तक समाधान का आश्वासन दिया है। यह प्रदर्शन सीमेंट कंपनी के स्थानीय प्रभाव और किसानों के अधिकारों को लेकर चल रहा था, जिसके चलते राजेंद्र गुढ़ा ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।

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