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पानी नहीं तो दुल्हन नहीं… डैम के करीब बूंद-बूंद को तरस रहे लोग, प्यास बुझाने को जलाने पड़ रहे पांव, दर्दनाक है इनकी कहानी

REPORT TIMES जल ही जीवन है… यह स्लोगन बताता है कि जीवन जीने के लिए पानी कितना महत्त्वपूर्ण है. इसी ‘जीवन’ को पाने के लिए राजस्थान का एक गांव तरस रहा है. पहाड़ी पर बसे गांव के लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए पैदल 2 किलोमीटर नीचे तक आना पड़ता है. गांव की महिलाओं की उम्र पानी का इंतजाम करने में गुजरती जा रही है. अब आलम यह है कि गांव के युवाओं को दुल्हन मिलना दूभर हो रहा है. कोई भी अपनी बेटी को इस गांव में ब्याहना नहीं चाहता.

यह अभागा गांव राजस्थान के चेरापूंजी और सो टापुओं के शहर के नाम से मशहूर बांसवाड़ा में है. गांव का नाम है कुंडल और दुर्भाग्य की बात यह है कि माही नदी की अथाह जलराशि के बावजूद छोटी सरवन उपखंड में पानी की भयंकर किल्लत है, जिससे गांववालों की जिंदगी नरक बन गई है. तपती गर्मी में गांव की 300 की आबादी पानी की दो बूंद के लिए 1-2 किलोमीटर का सफर तय करती है.

गांव में नहीं आ रही कोई दुल्हन

पानी की इस कमी ने गांव में सामाजिक जीवन को भी प्रभावित किया है, जहां लोग अपनी बेटियों की शादी कुंडल गांव में करने से कतराते हैं.गांव के पढ़े-लिखे युवाओं का कहना है कि पानी की किल्लत के कारण उनकी शादी तक अटक गई है. एक ग्रेजुएट युवक ने बताया, “जब कोई रिश्ता लेकर आता है, तो पानी की समस्या देखकर लोग बेटी की शादी से इनकार कर देते हैं.”

300 लोग और एक हैंडपंप

70 घरों वाले इस गांव में सिर्फ एक हैंडपंप है, जहां पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है. यह हैंडपंप न केवल 300 लोगों की प्यास बुझाता है, बल्कि सैकड़ों मवेशी भी इसी पर निर्भर हैं. ऊंची पहाड़ी पर बसे इस गांव में गर्मी शुरू होते ही जलाशय सूख जाते हैं. कुएं और नदियां तो पूरी तरह सूख चुकी हैं और अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं. हर घर नल योजना केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है. ग्रामीणों ने बताया कि पानी की समस्या को लेकर पीएचईडी विभाग को कई बार शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला.

पानी भरकर ड्रम में लगा देते हैं ताला

पानी की तलाश में पहाड़ी से उतरकर 1-2 किलोमीटर का सफर करने वाली महिलाओं ने नेताओं और सरकारी सिस्टम की पोल खोल दी है. ग्रामीणों का कहना है कि “नेता सिर्फ वोट लेने चुनाव में आते हैं, बाद में हमारी सुध लेने कोई नहीं आता.” ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि पंचायती राज चुनाव में नेताओं को गांव में घुसने नहीं देंगे. गर्मी के दिनों में जलाशयों के सूख जाने के बाद ग्रामीण दूर-दराज से पानी लाकर ड्रम में भरते हैं और उसे ताला लगाकर रखते हैं.

महिलाओं में गुस्सा

महिलाएं ड्रम में इकट्ठा किए इस पानी को पीने, खाना बनाने और नहाने के लिए कई दिनों तक इस्तेमाल में लेती हैं. गांव की महिलाओं और युवाओं ने सरकार से तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की है. गांव में देखा गया कि पानी के लिए तपती गर्मी में घंटों इंतजार करती महिलाओं का गुस्सा साफ झलक रहा था. ग्रामीणों ने कहा, “सरकार को हमारी सुध लेनी चाहिए और पानी की समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए.”

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