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राजस्थान सरकार ने 24 अफसरों के खिलाफ दी मुकदमा चलाने की मंजूरी, बाबूलाल कटारा को राहत

REPORT TIMES : राजस्थान में रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए 24 अफसरों के खिलाफ भजनलाल सरकार ने गुरुवार को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. इनमें हाई-प्रोफाइल घूसकांड में फंसी पूर्व SDM पिंकी मीणा और तत्कालीन RAS अधिकारी पुष्कर मित्तल भी शामिल हैं. इन दोनों के खिलाफ अब 4 साल बाद केस चलाने का रास्ता साफ हो गया है. जिन 24 अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने अभियोजन स्वीकृति जारी की है, उसमें पिंकी मीणा (तत्कालीन SDM, बानसूर), पुष्कर मित्तल (तत्कालीन SDM, दूदू), सुशील कुमार सिंह, नवीन माहूर, अख्तर हुसैन और अन्य 20 अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ चार्जशीट ACB ने पहले ही दाखिल कर रखी है.

शादी से पहले पकड़ी गई थीं SDM पिंकी मीणा

इनमें सबसे चर्चित मामला साल 2021 का है जब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण से जुड़े मामले में ACB ने करोड़ों की रिश्वत डील का भंडाफोड़ करते हुए पिंकी मीणा और पुष्कर मित्तल को गिरफ्तार किया था. एसीबी ने चालान पेश कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलने से 4 साल तक केस फाइलों में धूल फांकता रहा. अब जाकर सरकार ने हर मंजूरी दे दी है. IAS बनने का सपना देखने वाली पिंकी मीणा की गिरफ्तारी ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी. शादी से कुछ ही दिन पहले उन्हें ACB ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा था. बाद में कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी. पुष्कर मित्तल भी रिश्वत लेने के आरोप में उसी दौरान गिरफ्तार हुए थे. उनकी भूमिका भी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे में ठेकेदारों से घूस मांगने को लेकर ACB जांच के दायरे में आई थी.

बाबूलाल कटारा के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं

राज्य सरकार ने RAS से IAS बनीं निर्मला मीणा के खिलाफ भी अभियोजन स्वीकृति दे दी है. उन पर जोधपुर में पदस्थ रहते हुए राजस्व पट्टों में घोटाले का आरोप है. रिटायरमेंट के बाद भी अब उनके खिलाफ केस चलेगा. आरोपों की जांच साल 2018 से लंबित थी. इस बीच RPSC पेपर लीक केस में आरोपी रहे निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा को राहत मिली है. सरकार ने उनके खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं दी है, जिससे उनके खिलाफ केस पर फिलहाल रोक लग गई है. राज्य सरकार के इस कदम को प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में अहम माना जा रहा है. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों पर कार्रवाई न होने की आलोचना लगातार हो रही थी. अब देखना होगा कि ये मुकदमे न्यायिक प्रक्रिया में कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं.

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