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जब सरदार पटेल से भिड़े राजस्थान के नेता:सिरोही-माउंट आबू को गुजरात में मिलाना चाहते थे पटेल; विरोध से इतने नाराज हुए, मुकदमा तक चलवाया

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देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था, लेकिन राजस्थान को बनने में साढ़े आठ साल से ज्यादा लगे। 1947 में राजस्थान 19 रियासतों, 3 ठिकानों और एक केंद्र शासित प्रदेश में बंटा हुआ था, इसे राजपूताना के नाम से जाना जाता था। देश के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल ने इन रियायतों के एकीकरण का काम हाथ में लिया। सात फेज में राजस्थान बना था। 30 मार्च 1949 को जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों ने संयुक्त राज्य राजस्थान में विलय कर दिया, इसे ग्रेटर राजस्थान का नाम दिया गया था। इसी दिन को आधार बनाकर हर साल 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता है।

देसी रियासतों और ठिकानों को एक करना आसान काम नहीं था। इस काम में सरदार पटेल ने अहम भूमिका निभाई। राजस्थान के एकीकरण में कई तरह की दिक्कतें थीं। कई देसी रियासतों के राजा शुरुआत में स्वतंत्र रहना चाहते थे, लेकिन बीकानेर, उदयपुर जैसी रियासतों के शासक बदलते माहौल को पहचान गए थे। उन्होंने स्वतंत्र रहने की बजाय राजस्थान में शामिल होने का विकल्प चुना। राजस्थान बनने का प्रोसेस 17 मार्च 1948 में मत्स्य संघ से शुरू हुआ जो 1 नवंबर 1956 को केंद्र शासित प्रदेश अजमेर मेरवाड़ा और माउंट आबू को राजस्थान में मिलाने के बाद पूरा हुआ।

30 मार्च 1949 को सिटी पैलेस में किया राजस्थान का उद्घाटन
सरदार पटेल ने 30 मार्च, 1949 को जयपुर के सिटी पैलेस में राजस्थान का उद्घाटन किया था। पटेल ने जयपुर रियासत के तत्कालीन महाराजा सवाई मानसिंह को राजप्रमुख और कोटा के राजा भीमसिंह को उप राजप्रमुख पद की शपथ दिलवाकर राजस्थान की शुरुआत की।

राजप्रमुख सवाई मानसिंह ने बाद में हीरालाल शास्त्री को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। उस वक्त मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री का पद होता था। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद राजप्रमुख की जगह राज्यपाल और प्रधानमंत्री की जगह मुख्यमंत्री का पद हुआ था।

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