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किस्से मुलायम सिंह यादव के: गुस्सैल नेताजी एक बार दरोगा को मंच पर पटकने ही वाले थे

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तारीख थी 26 जून और साल 1960। मैनपुरी के करहल जैन इंटर कॉलेज में कव‍ि सम्मेलन चल रहा था। उस समय के मशहूर कवि दामोदर स्वरूप विद्रोही मंच पर पहुंचते हैं और कविता ‘दिल्ली की गद्दी सावधान’ पढ़ना शुरू करते हैं। कविता सरकार के खिलाफ थी। इसे देखकर वहां तैनात दरोगा ने मंच पर जाकर माइक छीन ली और कविता पढ़ने से मना किया। मंच के पास ही खड़े मुलायम सिंह यादव की उम्र उस समय यही कोई 20-21 की रही होगी। उन्हें दरोगा के ऊपर इतना गुस्सा आया कि चढ़ गए मंच पर। दरोगा को उठाकर पटकने ही वाले थे कि स्कूल में तैनात शिक्षकों ने मुलायम को समझाया, तब जाकर कहीं मामला शांत हुआ।

टीचर को धमकी देने वाले दरोगा का कराया तबादला
मुलायम सिंह को स्कूल के दिनों में उदय प्रताप सिंह अंग्रेजी पढ़ाते थे। उदय प्रताप ने एक इंटरव्यू में किस्सा सुनाया था कि कैसे मुलायम ने उनके लिए एक सीओ का तबादला करवा दिया था। उन्होंने बताया कि जब वह इटावा के नारायण कॉलेज के प्रिंसिपल थे तब एक लड़के को नकल करते पकड़ लिया था। लड़के ने देख लेने की धमकी दी। बाद में पता चला कि उस लड़के के पिता पुलिस विभाग में सर्किल ऑफिसर थे, इसलिए वह रौब गांठता था। इसकी जानकारी मुलायम तक पहुंच गई। मुलायम ने तुरंत मुझसे बात की और फिर तब के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह से बात करके सीओ का तबादला करवा दिया।

कुश्ती का भूत उदय मास्साब ने उतारा था
मुलायम के गुरु उदय प्रताप सिंह अक्सर एक किस्सा सुनाते थे। कहते थे मुलायम कुश्ती के इतने शौकीन थे कि एक बार तो वह परीक्षा छोड़कर दंगल जाने के लिए अड़े थे। दरअसल, इंटरमीडिएट की छमाही परीक्षा में मुलायम के कम नंबर आए थे। इसी बीच उन्हें पहलवानी का भूत सवार था। तब राज्य स्तर पर उनका नाम भी हो गया था। उन्हें स्टेट लेवल कुश्ती के लिए असम जाना था और परीक्षा के सिर्फ दो महीने बचे थे। तब उन्होंने मुलायम को बुलाया और कहा, दो महीने रह गए हैं परीक्षा के, अगर कुश्ती लड़ने गए तो अखबार में रोल नंबर नहीं मिलेगा। पास हो जाओगे तो कुछ बन जाओगे। तब मुलायम ने कहा था गुरुजी मैं कभी फेल नहीं होऊंगा। इसके बाद मुलायम ने खूब मन लगाकर पढ़ाई की।

खूंखार डकैत तहसीलदार से हुआ था सामना
एक पुराना किस्सा है। जब मुलायम को उन्हीं के गढ़ में चंबल के खूंखार दस्यु सरगना ने चुनौती दी थी। तब से लेकर सपा का सबसे मजबूत किला मानी जाने वाली सीट जसवंतनगर विधानसभा सीट से मुलायम सिंह को हराने के लिए चंबल के खूंखार डाकू तहसीलदार सिंह को भारतीय जनता पार्टी ने उतारा था। हालांकि चुनावी हिंसा के कारण यह चुनाव रद्द हो गया था, लेकिन 1991 का यह रोचक वाक्या कभी भुलाया नहीं जा सकता है। तब राम मंदिर आंदोलन चरम पर था।

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