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जानिए कैसे धर्मांतरण कर जेहाद के लिए फौज बना रहा हिज्ब-उत-तहरीर

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कट्टरपंथी संगठन हिज्ब उत तहरीर जेहाद के लिए नवयुवकों की एक फौज बना रहा है. युवाओं को भड़काऊ तकरीरें सुनाई जाती हैं और फिर उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें जिहाद के लिए तैयार कराया जाता है. इसका पहला चरण धर्म परिवर्तन होता है. The Kerala Story की तरह ही यह संगठन मध्य प्रदेश में भी युवकों को मुसलमान बनाकर उनसे लव जिहाद करा रहा था. इसके बाद इन्हें हथियारों की ट्रेनिंग भी दी जाती थी. मध्य प्रदेश ATS और NIA ने मिलकर ऐसे 16 लोगों को गिरफ्तार किया था जो हिज्ब उत तहरीर के सक्रिय सदस्य थे. इनमें से अकेले 11 एमपी से गिरफ्तार किए गए हैं. खास बात ये है कि 16 से 8 आरोपी ऐसे हैं जो कभी हिंदू थे, इनका पहले धर्मपरिवर्तन कराया गया और फिर जिहाद के लिए ट्रेनिंग दी गई. फिलहाल ये सभी 19 मई तक पुलिस रिमांड पर हैं.

क्या है हिज्ब-उत-तहरीर

हिज्ब उत तहरीर एक कट्टरपंथी संगठन है इसका उद्देश्य इस्लामिक उम्माह को फिर से जीवित करना है. अम्माह का अर्थ होता है राष्ट्र. संगठन की वेबसाइट के मुताबिक इसका उद्देश्य कुफ्र विचार, प्रणाली, कानून के प्रभाव को खत्म करना है. कुफ्र का मतलब ऐसे व्यक्ति से होता है जो ईश्वर की सत्ता को नहीं मानता. आसान भाषा में कहें तो यह संगठन इस्लामिक शासन को बहाल करने के लिए 1952 में गठित हुआ था. येरुशलम में गठित इस संगठन का हेड ऑफिस लंदन में हैं, लेकिन यूरोप, एशिया, दक्षिण एशिया खासकर इंडोनेशिया में इसका खासा प्रभाव है.

आतंक से जुड़ रहे तार, बनाते थे लव जिहाद का शिकार

हिज्ब उत तहरीर के गिरफ्तार सदस्य लड़कियों को लव जिहाद का शिकार बना रहे थे. एटीएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार सदस्यों में से हिंदू युवक पहले मुस्लिम बने और फिर इन्होंने लड़कियों का भी धर्म परिवर्तन कराया. मध्य प्रदेश के सौरभ के सलीम बनने वाले युवक ने भी अपनी पत्नी का धर्म परिवर्तन कराया था, इन आरोपियों के पास से विस्फोटक सामग्री, तकनीकी उपकरण और देश विरेाधी साहित्य भी मिला है. बताया जाता है कि इन्होंने बड़े शहरों में कुछ टारगेट भी तय किए थे, जिनकी ड्रोन से रेकी की गई थी. जिससे इनके तार आतंक से भी जुड़ रहे हैं.

सदस्यों को जैविक हथियारों की ट्रेनिंग देता है संगठन

मध्य प्रदेश ATS के मुताबिक संगठन युवाओं का ब्रेनवॉश कर जंगल में इन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग देता है, जांच एजेंसी ने ये भी साफ किया है कि ये सदस्य आपस में बातचीत के लिए एक एप का प्रयोग करते थे, ताकि सर्विलांस में न आएं. संगठन ऐसे युवकों का चुनाव करता था जो समय आने पर जान भी दे सकें. अमेरिका की ग्लोबल एजुकेशन कम्युनिटी कॉलेबोरेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिज्ब उत तहरीर की एक शाखा है जो युवाओं को केमिकल वेमन, बायोलॉजिकल हथियार आदि का भी प्रशिक्षण दिया जाता है.

शातिर तरीके से फैला रहा अपनी विचारधारा

यह कट्टरपंथी संगठन बेहद शातिर तरीके से दुनिया भर में अपनी विचारधारा फैला रहा है. तकरीबन पांच साल पहले ही सीटीएक्स जर्नल की एक रिपोर्ट में ये चेताया गया था कि यह संगठन भारत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. इस रिपोर्ट में इसे आईएस से भी ज्यादा खतरनाक बताया गया था.

50 से ज्यादा देशों में फैला, 10 लाख से ज्यादा सदस्य

हिज्ब उत तहरीर तकरीबन 50 देशों में फैला है, एक रिपोर्ट के मुताबिक संगठन के 10 लाख से ज्यादा सदस्य हैं. खास बात ये है कि संगठन का फोकस कट्टरपंथी युवाओं का एक बड़ा ढांचा तैयार करने पर है. इसके लिए वह ब्रेनबॉश कर हिंदू युवाओं का धर्म परिवर्तन करा रहा है. खास तौर से दक्षिण एशिया में इसकी सक्रियता ज्यादा है, इसीलिए भारत पर इसका ज्यादा खतरा है.

चीन-बांग्लादेश समेत कई देशों में लगा है प्रतिबंध

हिज्ब उत तहरीर गुपचुप तरीके से अपने मिशन को अंजाम देने में जुटा है. हालांकि कई बार विभिन्न देशों में इसके मंसूबे सामने आ चुके हैं और कई देश इस पर प्रतिबंध भी लगा चुके हैं. इनमें बांग्लादेश, चीन, जर्मनी, रूस, टर्की, इंडोनेशिया, लेबनान, यमन, और यूएई इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं.

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