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चंद्रशेखर ने राजस्थान में मिलाया बेनीवाल से हाथ, जाट-दलित का ये गठजोड़ कितना असरदार?

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राजस्थान विधानसभा के चुनाव में अब तक कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा मुकाबला समझा जाता है. दोनों दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है और एक-दूसरे के खिलाफ मुनादी कर ताल ठोक दी है. लेकिन इसी बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता चंद्रशेखर आजाद ने हाथ मिलाकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है. गुरुवार को हुई बैठक में दोनों नेताओं ने आरएलपी-एएसपी गठजोड़ कर साथ चुनाव लड़ने का एलान किया है, साथ ही घोषणा की है कि चुनावी मैदान में उनकी राह कांग्रेस और बीजेपी दोनों से अलग होंगी. दोनों ने साफ किया है कि उनमें सीटों के बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है और जल्द ही अपने अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान भी करेंगे. प्रदेश में जाटों और दलितों की जितनी बड़ी आबादी है, उसको देखते हुए यह गठजोड़ अलग गुल खिला सकता है.

राजस्थान में जाटों के वोट बैंक का गणित

राजस्थान में करीब 12 फीसदी जाट वोट बैंक है. यहां राजपूत और गुर्जरों दोनों का अलग-अलग वोट बैंक करीब 5 से 6 फीसदी है. लिहाजा जाट वोट बैंक इनके समीकरणों पर हमेशा भारी पड़ता रहा है. बात अगर हनुमान बेनीवाल की करें तो उन्हें राजस्थान में जाटों का बड़ा नेता माना जाता है. प्रदेश के जाट बहुल क्षेत्रों में हनुमान बेनीवाल की पार्टी का बड़ा दबदबा है.

प्रदेश में करीब 12 ऐसे जिले हैं जहां उनकी पार्टी के अच्छे खासे वोटर्स हैं. हनुमान बेनीवाल नागौर से सांसद हैं. पिछली बार उनकी पार्टी के 3 विधायक जीत कर आए थे. नागौर और शेखावटी के अलावा सीकर, झुंझनूं और जोधपुर ऐसे क्षेत्र हैं जहां जाटों की राजनीति की तूती बोलती है. इन क्षेत्रों की कई सीटों पर हनुमान बेनीवाल के काफी तादाद में समर्थक हैं.

राजस्थान में दलितों के वोट बैंक का गणित

दलित वोट बैंक 17 फीसदी के करीब है. इस प्रकार प्रदेश में जाटों और दलितों का समीकरण बड़ा उलटफेर कर सकने की क्षमता रखता है. प्रदेश में दलित आबादी अब तक कांग्रेस पार्टी को वोट करती रही है लेकिन अब यहां मायावती की बीएसपी ने भी सेंध लगाई है. साल 2018 के चुनाव में बीएसपी को 4 सीटें हासिल हुई थीं.

अब चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के राजस्थान के चुनावी मैदान में आने पर मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है. चंद्रशेखर आजाद की पार्टी कांग्रेस और मायावती दोनों के ही वोट बैंक में सेंध लगा सकती है.

कांग्रेस और बीजेपी की भी है इन वर्गों पर नजर

हालांकि बीजेपी ही नहीं बल्कि मल्लिकार्जुन खरगे को आगे करके कांग्रेस भी प्रदेश में दलित वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में है लेकिन कई ऐसी सीटें हैं जहां चंद्रशेखर आजाद की पार्टी इस वोट बैंक के गणित को प्रभावित कर सकती है. इनमें जयपुर की चाकसू, दूदू; नागौर में जायल और मेड़ता सीट; जोधपुर की भोपालगढ़ और बिलाड़ा विधानसभा सीट, गंगानगर में अनूपगढ़ और रायसिंहनगर सीटें मानी जा रही हैं.

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