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अलवर ग्रामीण सीट पर कांग्रेस से बदला लेने को बेताब BJP, पिछली बार मिली थी हार

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राजस्थान में धीरे-धीरे चुनावी रंग में ढलता जा रहा है, जैसे-जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से उम्मीदवारों के नाम का ऐलान होता जा रहा है, वैसे-वैसे दलों में नाराजगी भी सामने आने लगी है. कई जगहों पर टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का ऐलान तक किया जाने लगा है. सियासी रूप से अहम माने जाने वाले अलवर जिले में भी हलचल तेज हो गई है. जिले की 11 विधानसभा सीटों में अकेले 7 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है. जिले की अलवर ग्रामीण सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी. यहां पर कांग्रेस ने टीका राम जूली को तो बीजेपी ने जयराम जाटव को मैदान में उतारा है.

कितने वोटर, कितनी आबादी

2018 के चुनाव में अलवर ग्रामीण विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम में कांग्रेस को जीत मिली थी. कांग्रेस के टीका राम जूली को 85,752 वोट मिले थे तो भारतीय जनता पार्टी के मास्टर रामकृष्ण ने 59,275 वोट हासिल किए थे. टीका राम जूली ने 26,477 (15.3%) मतों के अंतर से चुनाव में जीत हासिल की. तब के चुनाव में अलवर ग्रामीण विधानसभा सीट पर कुल वोटर्स की संख्या 2,22,758 थी जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 1,18,855 थी तो महिला वोटर्स की संख्या 1,03,903 थी. इसमें से कुल 1,73,270 (78.3%) वोटर्स ने वोट डाले. NOTA के पक्ष में 1,236 (0.6%) वोट पड़े.

कैसा रहा राजनीतिक इतिहास

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अलवर ग्रामीण विधानसभा सीट के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो यहां पर अभी कांग्रेस के टीका राम जूली का कब्जा है. फिलहाल 2008 के परिसीमन में अलवर ग्रामीण विधानसभा सीट अस्तित्व में आई. तब से लेकर अब तक 3 बार हुए चुनाव में 2 बार कांग्रेस तो एक बार बीजेपी को जीत मिली है. अलवर ग्रामीण सीट पर 2008 के बाद 2018 में भी कांग्रेस के टीका राम जूली ने जीत हासिल की थी. जबकि 2013 के चुनाव में बीजेपी के जयराम जाटव को जीत मिली थी. इस सीट पर अनुसूचित जाति के वोटर्स की अधिक होने की वजह से यहां मुकाबला त्रिकोणीय होता रहा है. बीजेपी और कांग्रेस को बीएसपी चुनौती देती रही है. अलवर ग्रामीण सीट पर अनुसूचित जाति के वोटर्स के अलावा माली, गुर्जर, मेव, जाट, ब्राह्मण और मीणा वोटर्स निर्णायक भूमिका में रहते हैं. इस सीट पर कांग्रेस ने टीका राम जूली को मैदान में उतारा है तो बीजेपी की ओर से जयराम जाटव अपनी चुनौती पेश करेंगे. पिछले 3 चुनाव में इन्हीं 2 में से ही कोई चुनाव जीतता रहा है. पिछल बार टीका राम ने जयराम जाटव को हराया था. ऐसे में इस बार जयराम के पास पिछली हार का बदला लेने का मौका होगा.

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