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कटारिया की विदाई से क्या बदलेंगे समीकरण, BJP का संदेश या मौका?

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राजस्थान बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया  को असम का राज्यपाल बनाया गया है जिसके बाद उदयपुर से लगातार 8 बार के विधायक और मेवाड़ के खांटी नेता कटारिया अब करीब 5 दशक बाद राजस्थान की सक्रिय राजनीति से दूर होने जा रहे हैं. राजस्थान में विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने 79 साल के कटारिया को राज्यपाल बनाकर राजस्थान बीजेपी नेताओं को बदलाव के बड़े संकेत दिए हैं. माना जा रहा है कि बीजेपी ने इस बदलाव के जरिए उम्रदराज नेताओं की जगह नई पीढ़ी के नेताओं को आगे लाने के पैटर्न की एक शुरुआत की है. जानकारों का कहना है कि उम्रदराज नेताओं को सम्मानित तरीके से मार्गदर्शक मंडल में भेजकर नई पीढ़ी को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है. इधर कटारिया जैसे दिग्गज नेता के जाने के बाद प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें चल रही है. मेवाड़ और दक्षिण राजस्थान में राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चा जोरों पर है. बता दें कि कटारिया को विपक्षी दल को विधानसभा में घेरने की महारथ हासिल थी और उनके जाने को बीजेपी खेमे में कई तरह से देखा जा रहा है. कटारिया के कुछ समर्थकों का कहना है कि उन्हें एक सम्मानपूर्वक विदाई दी गई है वहीं कुछ का मानना है कि यह बीजेपी में एक जनरेशन शिफ्ट है.

बीजेपी ने दिया जनरेशन शिफ्ट का संदेश!

बताया जा रहा है कि कटारिया को राज्यपाल बनाकर राजस्थान बीजेपी में जनरेशन शिफ्ट का संदेश आलाकमान की ओर से दिया गया है. जानकार इसे नई पीढ़ी के नेताओं को मौका मिलने के तौर पर भी देख रहे हैं. गुलाबचंद कटारिया के जाने से अब मेवाड़ में अब टिकट को लेकर सुगबुगाहट शुरू भी हो गई है. वहीं कटारिया के राज्यपाल बनने के बाद अब आगे राजस्थान बीजेपी की अंदरूनी राजनीति में कई बदलाव देखने को मिलेंगे. कटारिया के हटने से नेता प्रतिपक्ष के साथ ही प्रदेश लेवल से लेकर उदयपुर तक जगह खाली होगी. बता दें कि राजनीति में ऐसा कहा जाता है कि किसी भी सक्रिय नेता के राजनीति से जाने के बाद कई नेताओं के लिए वह अवसर की तरह होता है. फिलहाल राज्य में बीजेपी में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, वरिष्ठ नेता ओम माथुर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, सांसद किरोड़ीलाल मीणा जैसे नेताओं के अपने खेमे हैं.

नेता प्रतिपक्ष ही बनेगा सीएम फेस !

वहीं विधानसभा का फिलहाल बजट सत्र चल रहा है ऐसे में अगले हफ्ते तक नेता प्रतिपक्ष के नाम पर फैसला हो सकता है. माना जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष के नाम से बीजेपी सीएम चेहरे का संकेत दे सकती है और नए नेता प्रतिपक्ष के आने से बीजेपी में नए सिरे से खेमेबंदी देखने को मिलेगी. चुनावी साल को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष के नाम से एक बड़ा सियासी संदेश देने की बीजेपी कोशिश कर सकती है. हालांकि बीजेपी सीएम फेस को लेकर अभी भी फंसी हुई है लेकिन बीते दिनों से पीएम मोदी की राज्य में सक्रियता से यह माना जा रहा है कि राजस्थान में भी पीएम मोदी और कमल के निशान वाले मॉडल पर बीजेपी आगे बढ़ सकती है.

मेवाड़ के बदलेंगे सियासी समीकरण

इसके अलावा कटारिया के जाने के बाद उदयपुर और मेवाड़ इलाके में राजनीतिक समीकरणों में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और कटारिया की जगह कौनसे नेता को दी जाएगी ये बड़ा सवाल बना हुआ है. कटारिया जैन समुदाय से आते थे और कटारिया के जाने के बाद उदयपुर से जातिगत समीकरणों को साधना भी एक बड़ी चुनौती होगी. मालूम हो कि करीब 5 दशकों तक राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहे कटारिया मंत्री, विधायक और सांसद रहे हैं.

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