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‘वीरांगनाओं के बहाने BJP नेता सेंक रहे राजनीतिक रोटियां’- CM गहलोत

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जयपुर: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 2019 में हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए 3 सीआरपीएफ जवानों की वीरांगनाओं का राजधानी में पिछले 10 दिनों से सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा के नेतृत्व में धरना जारी है. राज्य सरकार से विभिन्न मांगों को लेकर बना गतिरोध तमाम वार्ताओं के बाद भी बना हुआ है. वहीं गतिरोध तोड़ने के लिए सरकार ने मंगलवार को अपने कैबिनेट मंत्रियों और आला अधिकारियों को भेजा लेकिन वार्ता के बाद भी सहमति नहीं बन पाई और सरकार की ओर से सभी आश्वासन बेनतीजा रहे हैं. इधर वीरांगनाओं की मांगों पर सरकार ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप अपना पक्ष भी रखा है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देर रात जारी बयान में आरोप लगाया कि बीजेपी के कुछ नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए वीरांगनाओं का इस्तेमाल कर शहीदों का अपमान कर रहे हैं.दरअसल, सरकार का कहना है कि वीरांगनाओं की कुछ ऐसी मांगे हैं जो नियमों के तहत प्रावधानों में नहीं है जिनको लेकर ही सहमति नहीं बन पा रही है. वहीं सरकार का कहनी है कि वह शहीदों के सम्मान के लिए गंभीर है और हर स्तर पर पूरी मदद की गई है.

शहीदों की वीरांगनाओं का हो रहा इस्तेमाल : गहलोत

मुख्यमंत्री गहलोत ने मंगलवार रात आरोप लगाया कि बीजेपी के कुछ नेता अपने राजनीतिक फायदों के लिए रोटियां सेंकने का काम कर रहे हैं और शहीदों की वीरांगनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने वीरांगनाओं की मांगों को लेकर बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा का नाम लिए बिना निशाना साधा. गहलोत ने कहा कि शहीदों की वीरांगनाओं का इस्तेमाल कर उनका अनादर करना कभी भी राजस्थान की परंपरा नहीं रही है और मैं इसकी निंदा करता हूं. सीएम ने आगे कहा कि यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम शहीदों और उनके परिवारों का सम्मान करें और राजस्थान का हर नागरिक शहीदों के सम्मान का अपना कर्तव्य निभाता है लेकिन बीजेपी के कुछ नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं.

वीरांगनाओं की कई मांग नहीं है उचित : सीएम

वहीं सीएम ने वीरांगनाओं की मांगों पर कहा कि शहीद हेमराज मीणा की पत्नी उनकी तीसरी प्रतिमा एक चौराहे पर स्थापित करवाना चाहती हैं, जबकि पूर्व में शहीद की दो मूर्तियां राजकीय महाविद्यालय, सांगोद के प्रांगण और उनके पैतृक गांव विनोद कलां स्थित पार्क में स्थापित की जा चुकी हैं और अब ऐसी अन्य मांग शहीद परिवारों को दृष्टिगत रखते हुए उचित नहीं है. इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद रोहिताश लांबा की पत्नी अपने देवर के लिए अनुकम्पा नियुक्ति मांग रही हैं. उन्होंने कहा कि अगर आज शहीद लांबा के भाई को नौकरी दे दी जाती है तो आगे सभी वीरांगनाओं के परिजन-रिश्तेदार उनके और उनके बच्चे के हक की नौकरी अन्य परिजन को देने का अनुचित सामाजिक एवं पारिवारिक दबाव डालने लग जाएंगे.

‘शहीदों के बच्चों का हक मारना गलत’

गहलोत ने आगे अपने बयान में कहा कि क्या हमें वीरांगनाओं के सामने एक ऐसी मुश्किल परिस्थिति खड़ी करनी चाहिए क्योंकि वर्तमान में बनाए गए नियम पहले के अनुभवों के आधार पर ही बनाए गए हैं और शहीदों के बच्चों का हक मारकर किसी अन्य रिश्तेदार को नौकरी देना कैसे उचित हो सकता है? सीएम ने कहा कि जब शहीद के बच्चे बालिग होंगे तो उन बच्चों के भविष्य का क्या होगा? उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार ने यह प्रावधान किया है कि अगर शहादत के वक्त वीरांगना गर्भवती भी है और वह नौकरी नहीं करना चाहती है तो उसके गर्भस्थ शिशु के लिए नौकरी आगे के लिए सुरक्षित रखी जा सकती है.

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