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18 वकीलों की फौज ने खारिज की ATS की थ्योरी, कौन हैं आरोपियों को फांसी से बचाने वाले?

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जयपुर: राजस्थान की राजधानी में मई 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट मामले में हाल में राजस्थान हाईकोर्ट का एक फैसला आया जिससे पीड़ित परिवारों को करीब 15 साल बाद एक बड़ा झटका लगा जहां 29 मार्च को हाईकोर्ट ने सभी चार आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए सबूतों को गलत पाया जिसके आधार पर जयपुर ब्लास्ट में पकड़े गए मोहम्मद सैफ, सैफुर्रहमन, सरवर आजमी और मोहम्मद सलमान बरी हो गए. मालूम हो कि बम धमाकों को लेकर 2019 में चारों आरोपियों को जयपुर जिला कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी. वहीं हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी और न्यायिक अधिवक्ता को हटा दिया गया है लेकिन एक बात गौर करने वाली है कि सरकार ने वकीलों की फौज उतारी लेकिन फिर भी आरोपियों के वकीलों की दलीलों के सामने एटीएस की जांच के सभी तथ्य खारिज हो गए और अपराध साबित नहीं हो पाया. दरअसल जयपुर बम ब्लास्ट में चारों आरोपियों के बरी होने के पीछे उनकी उतारी गई वकीलों की फौज सबसे बड़ी वजह बनी. भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक आरोपियों की ओर से 18 वकीलों ने केस लड़ा जिनमें कई सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वकील रह चुके हैं. बता दें कि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के वकीलों का ग्रुप ‘प्रोजेक्ट-39ए’ ने ब्लास्ट के चारों आरोपियों का केस लड़ा जिसके लिए वकीलों ने कोई फीस तक नहीं ली.

क्या है ‘प्रोजेक्ट-39ए’ ?

बता दें कि आरोपियों को निचली कोर्ट से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद आरोपियों के परिजनों को विधिक सेवा कानून के तहत प्रदेश सरकार की ओर से न्याय मित्र दिए गए थे लेकिन उन्होंने न्याय मित्रों की जगह प्रोजेक्ट-39ए से यह केस लड़ने की अपील की जिसके बाद इस ग्रुप से वकील विभोर जैन, निशांत व्यास, मुजाहिद अहमद और रजत आदि ने केस को लड़ा और एटीएस की थ्योरी खिलाफ दलीलें पेश की. रिपोर्ट के मुताबिक इन वकीलों को महज 5-7 साल का वकालत का अनुभव है. वहीं वकीलों की इस फौज ने राजस्थान एटीएस की ओर से धमाके के बाद की गई जांच को तथ्यहीन साबित कर दिया जिसके आधार पर कोर्ट ने आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया. जानकारी के मुताबिक प्रोजेक्ट-39ए की टीम की ओर से देशभर में फांसी के मामलों में वकील उपलब्ध करवाए जाते रहे हैं.

प्रोजेक्ट-39ए ने खारिज की दलीलें

दरअसल एनएलयू का प्रोजेक्ट-39ए संविधान के अनुच्छेद-39ए से प्रेरित होकर बनाया गया है जहां वकील आर्थिक व सामाजिक परेशानियों से जूझ रहे आरोपियों की ऐसे मामलों में पैरवी करता है. वहीं जयपुर ब्लास्ट मामले में ग्रुप के वकीलों ने ब्लास्ट से इनकार नहीं किया लेकिन जांच एजेंसी एटीएस की ओर से जिन 4 लोगों को अपराधी बनाया गया था उन पर अपराध का मकसद और षड्यंत्र साबित नहीं हो पाया. एटीएस कोर्ट में यह साबित करने में विफल रही कि बम ब्लास्ट किसने किए?

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