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कांग्रेस की जीत का सिलसिला राजस्थान में रहेगा बरकरार! क्या अशोक गहलोत का चलेगा सिक्का?

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जयपुर: कर्नाटक में कांग्रेस को 34 साल के लंबे अंतराल के बाद भारी भरकम जीत मिली है जिसके बाद देश भर के कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक नई ऊर्जा मिली है. कर्नाटक की जीत के बाद 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर कई तरह की अटकलें भी लगाई जाने लगी है लेकिन उससे पहले कई राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं जहां राजस्थान को लेकर सियासी गलियारों में काफी हलचल है. राजस्थान विधानसभा चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान चल रही है तो दूसरी ओर रिवाज बदलने का इतिहास राज्य में आज तक नहीं रहा है. पिछले दो दशक से लगातार कांग्रेस और बीजेपी का आवागमन लगा रहता है. ऐसे में कांग्रेस के सामने घर की लड़ाई से निपटने के बाद दूसरे से लड़ाई करने जैसी बड़ी चुनौती है. हालांकि राजनीति में जादूगर के नाम से फेमस अशोक गहलोत का कमाल कर्नाटक में भी देखने को मिला जहां राज्य की योजनाओं और जनता के लिए किए गए कामों का वहां जिक्र हुआ और जनता ने कांग्रेस के विजन डॉक्यूमेंट पर मुहर लगाते हुए सत्ता की चाबी सौंपी है. ऐसे में इस साल के आखिर में होने वाले राजस्थान चुनावों को लेकर अब सवाल बना हुआ है कि क्या गहलोत अपनी योजनाओं के बूते राज्य की परंपरा को तोड़ पाएंगे. हालांकि संगठन की कई कमजोर कड़ियां कांग्रेस को राज्य में नुकसान पहुंचा सकती है, वहीं बीजेपी कर्नाटक के बाद अपनी रणनीति में बदलाव करेगी.

सत्ता रूढ़ दल और एंटी इंकम्बेंसी की लहर

कर्नाटक के नतीजों से भले ही राजस्थान के समीकरणों को टटोला जा रहा है लेकिन राजस्थान कि राजनीतिक परिस्थितियां वहां से काफी अलग है जहां कर्नाटक में बीजेपी सत्ता में थी तो कांग्रेस की राजस्थान में सरकार है ऐसे में 5 सालों बाद हर राज्य में सत्तारुढ़ दल के लिए एंटी इंकम्बेंसी की लहर होती है जिसको पाटना गहलोत के लिए एक चुनौती भरा काम होगा.इसके अलावा कर्नाटक में भी राजस्थान की तरह ही 5 साल में सत्ता बदलने वाला रिवाज रहा है ऐसे में कांग्रेस को यहां गहलोत की योजनाओं और काम के अलावा विशेष रणनीति पर काम करना होगा क्योंकि राजस्थान में आज तक के इतिहास में रिवाज नहीं बदला है. इसके अलावा बीजेपी राजस्थान में फिर एक बार पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनावी मैदान में उतरेगी जहां कांग्रेस को कर्नाटक की तरह मुद्दों को आखिर तक बनाए रखना होगा.

चुनावों से पहले चर्चा में राजस्थान मॉडल

गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान और कांग्रेस के घोषणापत्र में भी हिमाचल प्रदेश की तरह राजस्थान मॉडल यानि राजस्थान सरकार की योजनाओं को जगह दी गई और कांग्रेस की भविष्य को लेकर रूपरेखा बताई गई. इसके कांग्रेस ने कर्नाटक में महंगाई को भी बड़ा मुद्दा बनाया जहां राजस्थान में गहलोत महंगाई राहत कैंप लगा रहे हैं और खुद पूरे प्रदेश में घूमकर जायजा ले रहे हैं.अब कर्नाटक के बाद आने वाले दिनों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव है जहां इस जीत के बाज कांग्रेस में एक उत्साह की लहर है. हालांकि समय रहते कांग्रेस को गहलोत-पायलट के बीच की खींचतान को दूर कर कोई बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा क्योंकि पायलट की यात्रा को लेकर किए गए एक सर्वे में पता चला है कि पायलट की यात्रा से 30-40 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इससे नुकसान होगा.

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