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ना सेना, ना गोला बारूद और ना ही पैसा; हिरोशिमा में पीएम मोदी से जेलेंस्की ने मांगी सिर्फ शांति

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व्यक्तिगत रिश्तों से कूटनीति नहीं चलती. चाहकर भी कोई देश दूसरे देश की मदद केवल व्यक्तिगत कारणों या दयाभाव के साथ नहीं कर सकता. क्योंकि फैसले देश के लिए होते हैं. देश के लिए जो उचित होगा वही फैसला लिया जाएगा. पीएम मोदी तीन देशों की यात्रा कर आज सुबह स्वदेश लौट आए. यहां पर उनका स्वागत हुआ. इस दौरे में सबसे खास था पीएम मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की मीटिंग. जोकि युद्ध होने के बाद पहली बार हो रही थी. विश्व के सबसे पड़े लोकतांत्रिक देश भारत से यूक्रेन को ढेरों उम्मीदें हैं. अमेरिका भी ये कह चुका है कि भारत यूक्रेन-रूस के बीच मध्यस्थता कर सकता है. जब जेलेंस्की और मोदी आपस में मिले तो दोनों देशों के अधिकारियों ने इसकी पूरी तैयारी कर ली थी. जी-7 मीटिंग के इतर पीएम मोदी और जेलेंस्की की बातें हुईं. जेलेंस्की ने पीएम मोदी ने सिर्फ शांति की मांग की. पीएम मोदी से उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि भारत शांति प्रस्ताव का समर्थन करे. इसके अलावा भारत ने यूक्रेन ने कोई और मांग नहीं की. इसके पीछे भी एक कारण है. भारत की अपनी कुछ पाबंदियां हैं. भारत की अपनी कूटनीति है. भारत ने कभी भी यूक्रेन को मानवीय मदद के लिए मना नहीं किया. पुतिन से पीएम की मुलाकात हुई थी तो उन्होंने युद्ध को किसी भी मायने में जायज नहीं ठहराया था. पीएम ने कहा कि इस समस्या का हल कूटनीतिक तौर पर निकाला जाना चाहिए.

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जेलेंस्की ने भारत को नहीं डाला धर्म संकट में

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जेलेंस्की यूरोप से सैन्य मदद मांगते हैं. यूरोप उनकी मदद कर रहा है. अमेरिका से वो युद्ध का सामान ले ही रहे हैं लेकिन क्या कारण था कि उन्होंने भारत से या पीएम मोदी से किसी भी तरह की सैन्य मदद नहीं मांगी. इसके पीछे का कारण है भारत की कूटनीतिक. जब भी रूस के खिलाफ कोई प्रस्ताव आया भारत ने खुद को यूएन से अलग कर दिया. भारत और रूस के रिश्ते बहुत पुराने है. जब अमेरिका भारत के खिलाफ हो गया था तो रूस ही एक देश था जो भारत का साथ निभा रहा था. ये इतिहास यूक्रेन भी काफी अच्छे से जानता है. जेलेंस्की पीएम मोदी का सम्मान करते हैं. वो नहीं चाहते कि भारत को किसी धर्म संकट में डाला जाए. इसलिए जेलेंस्की ने सिर्फ शांति प्रस्ताव पर समर्थन मांगा.

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पीएम मोदी ने शांति प्रस्ताव पर मांगा समर्थन

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जी-7 के मंच में यूक्रेन राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को अगर सबसे ज्यादा उम्मीदें थीं तो भारत से. क्योंकि भारत शांति पर विश्वास रखने वाला और विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भी है. जेलेंस्की ने पीएम मोदी को यूक्रेनी पीस फॉर्मूला इनिशिएटिव के बारे में बताया. जेलेंस्की ने वो उपाय बताया जिससे ये 15 महीने बाद से जारी युद्ध रुक सकता है. जेलेंस्की ने इसी यूक्रेनी पीस फॉर्मूला इनिशिएटिव जिसको आसान भाषा में शांति प्रस्ताव कह सकते है, पीएम का समर्थन मांगा. इसके साथ ही पीएम को यूक्रेन का न्यौता भी दिया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पीएम मोदी ने इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है.

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