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बीजेपी का अभेद्य किला है बाली सीट, 8 बार से चुनाव हार रही है कांग्रेस

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राजस्थान के पर्यटन का हब कहा जाने वाला बाली प्रदेश के चर्चित विधानसभा सीटों में से एक है. पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत की धरती के नाम से भी इस क्षेत्र को जाना जाता है. प्रदेश की सियासत में इस क्षेत्र का खास मुकाम है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्यसभा सांसद तथा छत्तीसगढ़ के बीजेपी प्रभारी ओमप्रकाश माथुर भी इसी विधानसभा से आते हैं. अभी पाली जिले में पड़ने वाली बाली सीट से बीजेपी के पुष्पेंद्र सिंह राणावत विधायक हैं. पिछले 25 साल से विधायक पुष्पेन्द्र सिंह राणावत प्रदेश की बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार में ऊर्जा मंत्री रह चुके है. सफाई के मामले में तो इस शहर का कोई मुकाबला ही नहीं है. यहां की बाली और देसूरी को परिसीमन कर बाली विधानसभा सीट बना दिया जो राज्य की राजनीति में लगातार सुर्खियों में रही. पिछले 8 बार से चुनाव में हार का सामना करने के बाद भी कांग्रेस यहां से जीत हासिल नही कर सकी, लेकिन इस बार कांग्रेस की कोशिश यह सीट बीजेपी से छीनने की होगी.

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कितने वोटर, कितनी आबादी

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2018 के चुनाव में बाली सीट पर कुल 11 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला रहा. लेकिन बीजेपी और कांग्रेस गठबंधन के बीच मुख्य मुकाबला दिखा. बीजेपी के पुष्पेंद्र राणावत ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के साझा उम्मीदवार उम्मेद सिंह को आसान मुकाबले में 28,187 मतों के अंतर से हरा दिया था. पुष्पेंद्र को 96,238 वोट मिले तो उम्मेद सिंह को 68,051 वोट मिले. 5 साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में बाली सीट से कुल 2,98,251 वोटर्स थे, जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 1,55,638 थी जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 1,42,613 थी. इसमें 1,91,065 (65.9%) वोट पड़े. जबकि NOTA के पक्ष में 5,334 (1.8%) वोट आए. बाली विधानसभा में दो तहसील है बाली और देसूरी – इसमें बाली तहसील की कुल साक्षरता दर 69.43% है.

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कैसा रहा राजनीतिक इतिहास

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इस सीट का ताना-बाना कुछ ऐसा है कि यहां मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी में ही होता रहा है. हालांकि 1990 के बाद की यहां की राजनीति पर नजर डालें तो यहां ज्यादातर समय बीजेपी का विधायक ही जीतता रहा है. 1990, 1993 और 1998 के चुनाव में बीजेपी की ओर से भैरों सिंह शेखावत विधायक बने तो 2003 में बीजेपी के पुष्पेन्द्र सिंह राणावत जीत हासिल की और तब से लगातार जीत हासिल कर रहे हैं. इस सीट पर पिछले आठ बार से यानी 40 सालों से बीजेपी का ही कब्जा है. पूर्व उपराष्ट्रपति और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत तीन बार यहां से विधायक रहें. उनके उपराष्ट्रपति बनने के बाद बीजेपी ने पुष्पेंद्र सिंह को यहां से टिकट दिया और हर बार वह चुनाव जीत रहे हैं. 2018 के चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन में एनसीपी के उम्मेद सिंह चंपावत बीजेपी के वर्तमान विधायक पुष्पेंद्र सिंह राणावत के हाथों हार गए.

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सामाजिक-आर्थिक ताना बाना

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बाली सीट का गौरवशाली इतिहास रहा है. क्षेत्र में राठौड़, चौहान, मेड़तिया, सोलंकी, राजपूत, चारण, राजपुरोहित के जमींदारों, चौधरी, देवासी, कुम्हार और मेघवाल लोगों की संख्या ज्यादा है. इस शहर की स्थापना का श्रेय पूर्व राजपूत शासकों को दिया जाता है जिनके जमींदारों के परिवार बेहद शाही जिंदगी जीते थे. बाली के दौर में सफाई के मामले में इस क्षेत्र का कोई तोड़ ही नहीं है. पूरे जिले और प्रदेश के लिए बाली एक नजीर बन चुका है. बाली अपने विशेष खान-पान के लिए भी जाना जाता है. यहां की खास चीजों में मारवाड़ी दाल बाटी चूरमा, मक्का की रोटी के साथ सरसों और कड़ी पसंद की जाती है. यहां पर कई तरह की नमकीन और मिठाई भी मिलती है. फालना का दही वड़ा और देसूरी खट्टा समोसा भी बेहद लोकप्रिय है. बाली बेहद समृद्ध क्षेत्रों में गिना जाता है. इस शहर की अपनी ऐतिहासिक विरासत है. कई शानदार महल जैसे रजवाड़ा, होटल पैलेस और बाग पैलेस प्रसिद्ध हैं. यहां का विश्व प्रसिद्ध रणकपुर जैन मंदिर, आशापुरा माता, सोनाणा खेतलाजी, राजस्थान का अमरनाथ कहलाने वाले परशुराम महादेव निबोर नाथ महादेव, आईमाता और कई मंदिर भी बेहद प्रसिद्ध है. साथ ही यहां पर कई प्राकृतिक खूबसूरती भी लोगों का मन मोहने के लिए काफी है. कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण वाटरफॉल और पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध जवाई लेपर्ड और जंगल सफारी अरावली पर्वतमाला में प्राकृतिक वॉटर फॉल को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं. यहां राजस्थान एको टूरिज्म जिसकी वजह से पूरे प्रदेश और देश-विदेश से आए पर्यटकों की हर समय भरमार रहती है.

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