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बंबीहा गैंग के बिजनेस मॉडल का खुलासा, खालिस्तानी आतंकियों के लिए गरीबों से करते थे वसूली

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कनाडा में गैंगस्टर सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खा की हत्या के बाद बंबीहा गैंग चर्चा में है. दरअसल, सुखदूल बंबीहा गैंग से ही ताल्लुक रखता था. साल 2017 में जाली दस्तावेजों के जरिए वो कनाडा पहुंचा और वहां अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला के राइट हैंड के तौर पर काम कर रहा था. अब इस बीच, बंबीहा गैंग के बिजनस मॉडल को लेकर खुलासा हुआ है, आखिर ये किनसे वसूली करता था, ये खुलासा NIA ने किया है . NIA ने अपनी जांच में पाया कि बंबीहा गैंग से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर कौशल चौधरी, अमित डागर और संदीप बंदर गुरुग्राम की खांडसा मंडी से सब्जी बेचने वालों और बड़े आढ़तियों से हर महीने एक फिक्स रकम रंगदारी के तौर पर वसूलते थे. ये गैंग ट्रक ड्राइवर से लेकर आढ़तियों तक से वसूली करता था.

सब्जी वालों से वसूलते थे पैसे

NIA ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि साल 2010 से गैंगस्टर सब्जी वालों से पैसे वसूलते थे. पहले ये काम सूबे गुर्जर करता था, लेकिन 2016 के बाद कौशल चौधरी गैंगस्टर अमित डगर की मदद से रंगदारी वसूलने लगा. रंगदारी को पूरी तरह संगठित तरीके से वसूला जाता जिसको बाकायदा ‘राहत’ सेवा का नाम दिया और उसको अमित डगर की पत्नी ट्विंकल कौशिक अपने सहयोगियों के जरिए नेक्सस को चलाती और रंगदारी वसूलती थी. जांच के दौरान ये भी पता चला कि गुरुग्राम की खांडसा और दिल्ली की आजादपुर मंडी से कौशल चौधरी और अमित डागर गैंग ट्रक ऑपरेटर्स से हर महीने 1 लाख 25 हजार रुपये रंगदारी के तौर पर लेते थे. जांच के दौरान ये भी पता चला कि जो पॉलिथीन 120-130 रुपये किलो बिकती थी उसको 160 से 179 किलो के रेट पर बेचे जाता ताकि बड़ा हुआ मुनाफा गैंग मेंबर को दिया जाए.

जेनरेटर ऑपरेटर से 1 लाख रुपये रंगदारी

NIA को अपनी जांच में ये भी पता चला कि मंडी के अंदर जो जेनरेटर ऑपरेटर काम करते थे उनसे भी हर महीने 1 लाख रुपये रंगदारी के तौर पर मांगे जाते थे. चार्जशीट में खुलासा हुआ कि कौशल चौधरी और अमित डागर गैंग सब्जी मंडियों से हर महीने 25 लाख रुपये की रंगदारी वसूलते थे. अगर कोई सब्जी बेचने वाला इनको रंगदारी देने से मना कर देता तो ये उसके साथ मारपीट और उसकी रेहड़ी को तोड़ देते थे और यही कारण था कि कोई भी इनकी शिकायत पुलिस से नहीं करता था. कौशल चौधरी ने अपने डर के इसी कारोबार को दिल्ली की कई सब्जी की मार्केट में फैला दिया था, जिसमें पालम और वसंत कुंज जैसे इलाके भी शामिल हैं. जिसके बाद ये लोग शराब के ठेकों का कॉन्ट्रेक्ट भी लेने लगे ताकि ज्यादा मुनाफा हो सके और उन पैसों से हथियार खरीदे और पैसों को खालिस्तानी आतंकियों तक पहुंचाया जाए.

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