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दिल्ली पहुंचा राजस्थान कांग्रेस का नया विवाद, कौन चमकाएगा CM गहलोत की छवि?

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच आलाकमान ने बमुश्किल सुलह कराई लेकिन ऐन चुनाव से पहले अब सर्वे और प्रचार संभालने वाले दो सियासी रणनीतिकारों के बीच की तकरार दिल्ली पहुंच गई है. ये रणनीतिकार हैं सुनील कोनूगोलू और सीएम गहलोत की ब्रांडिंग करने वाली कंपनी डिजाइन बॉक्स, जिसके फाउंडर नरेश अरोड़ा हैं. कांग्रेस पार्टी के सियासी रणनीतिकार सुनील कोनूगोलू ने इससे पहले हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के बाद अन्य राज्यों में सर्वे से लेकर प्रचार प्रसार की रणनीति संभाली थी जबकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अपनी और सरकार की छवि सुधारने के लिए डिजाइन बॉक्स नाम की कम्पनी को चुना.

सुनील कोनूगोलू के सर्वे पर गहलोत को भरोसा नहीं

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय संगठन के कहने पर सुनील कोनूगोलू की टीम ने सर्वे करके 50 फीसदी टिकट काटने की सिफारिश कर दी है.जबकि गहलोत इतने बड़े पैमाने पर टिकट काटने के हक़ में नहीं हैं. उनका मानना है जिन लोगों ने उनकी सरकार बचाई, उनका टिकट न कटे. अगर टिकट काटना ही है तो पहले उन बागियों की कटे जो एक वक्त सरकार गिराने में लगे थे. ऐसे में गहलोत ने डिजाइन बॉक्स से अलग सर्वे करने को कहा है.

डिजाइन बॉक्स के मुखिया और डोटासरा के बीच कहासुनी

मामला तनावपूर्ण तब हो गया जब हाल में प्रभारी महासचिव सुखजिंदर रन्धावा, पीसीसी चीफ़ गोविंद सिंह डोटासरा से डिजाइन बॉक्स के मुखिया मिलने पहुंचे. बताया जा रहा है कि इस बैठक में डिजाइन बॉक्स के मुखिया और डोटासरा के बीच कहासुनी हो गयी, जिसमें डिजाइन बॉक्स के मुखिया ने राहुल गांधी पर टिप्पणी कर दी. इसके बाद डोटासरा का पारा और चढ़ गया. तब रन्धावा ने मामले को शांत कराया और डिजाइन बॉक्स के मुखिया को कमरे से बाहर जाने को कह दिया.

राहुल नाम आने पर दिल्ली पहुंचा मामला

बैठक के दौरान पूरे विवाद में राहुल गांधी का जिक्र आने पर ये मामला दिल्ली दरबार भी पहुंच गया है. सुनील कोनूगोलू से राजस्थान का काम सम्भालने को कहा गया लेकिन कोनूगोलू ने गहलोत से साफ कर दिया है कि वो डिजाइन बॉक्स के साथ काम नहीं करेंगे.

बताया जा रहा है कि कोनूगोलू ने इस बाबत कांग्रेस आलाकमान को भी इसकी जानकारी दे दी है. इसके बाद आलाकमान ने प्रभारी सुखजिंदर रन्धावा से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद ही आगे का फैसला किया जाएगा. तब तक आलाकमान गहलोत के कदम का इंतज़ार कर रहा है.

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