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भूपेश बघेलः छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को जीत दिलाने वाले नेता, इस बार पाटन सीट पर मिल रही डबल चुनौती

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छत्तीसगढ़ में इस बार चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक ओर जहां कांग्रेस को लगातार दूसरी बार जीत दिलाने की कोशिशों में लगे हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी भी फिर से सत्ता पर काबिज होना चाहती है. कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में जीत के लिए भूपेश बघेल पर पूरा भरोसा है. वहीं विपक्षी दलों की ओर से भूपेश बघेल को कड़ी चुनौती देने की कोशिश की जा रही है. भूपेश बघेल दुर्ग जिले की पाटन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और विपक्षी दलों की ओर से भी उन्हें चुनौती दी जा रही है. भारतीय जनता पार्टी ने भूपेश बघेल के भतीजे और पूर्व विधायक विजय बघेल को मैदान में उतारा है. दोनों नेताओं के बीच पहले भी कई मुकाबले हो चुके हैं. इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे और कांग्रेस छत्तीसगढ़-जोगी (जेसीसीजे) के नेता अमित जोगी भी पाटन से चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में भूपेश बघेल के सामने अपनी सीट बचाने का बड़ा दबाव भी रहेगा.

सीएम बघेल का हलफनामा

पाटन सीट के लिए अपने चुनावी हलफनामे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया है कि उनके पास 1,08,78,591 रुपये की अचल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल के पास उनकी तुलना में ज्यादा संपत्ति है. मुक्तेश्वरी बघेल के पास 3 करोड़ 11,69,515 रुपये की चल संपत्ति है. इसके अलावा उनके बैंक खातों में 56.03 लाख रुपये जमा हैं. मुक्तेश्वरी के खाते में 1.38 करोड़ रुपये जमा हैं. साथ ही बघेल दंपति के पास 2 किलो चांदी भी है, जिसकी बाजार में कीमत 1.50 लाख रुपये है. भूपेश बघेल के पास अकेले 10 तोला सोना है, जबकि उनकी पत्नी के पास करीब 40 तोले सोना है. इसके अलावा उनके पास 3 ट्रैक्टर भी हैं. मुख्यमंत्री के अनुसार उनके खिलाफ 3 केस दर्ज हैं.

1993 में पहली बार पाटन से विधायक बने

सीएम भूपेश बघेल को काका के नाम से भी बुलाया जाता है. वह छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बनने वाले तीसरे नेता हैं. इससे पहले वह छत्तीसगढ़ में 2014 से 2019 के बीच पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे. बघेल अविभाजित मध्य प्रदेश में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे. दिग्विजिय सिंह की सरकार में बघेल मंत्री थे. इसके अलावा वह छत्तीसगढ़ के पहले राजस्व, लोक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग और राहत कार्य मंत्री रहे हैं. उनके ही नेतृत्व में 2018 में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी.23 अगस्त 1961 को दुर्ग में जन्मे बघेल ने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1980 के दशक में की थी. 1985 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए, और दुर्ग जिले के अध्यक्ष बनाए गए. वह 1993 में पहली बार पाटन विधानसभा सीट से चुने गए. 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन 2014 में वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए और फिर अपनी अगुवाई में 2018 में पार्टी को छत्तीसगढ़ में जीत दिलाई.

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