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मणिपुर में उग्रवादी समूह UNLF ने शांति समझौते पर किया हस्ताक्षर, अमित शाह ने बताया ‘हिस्टोरिक माइल्सस्टोन’

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मणिपुर के सबसे पुराने उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट का केंद्र के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाहने एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में कहा, “पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के मोदी सरकार के अथक प्रयासों से नई दिल्ली में यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए.उन्होंने इस समझौते को हिस्टोरिक माइल्सस्टोन करार देते हुए कहा कि इससे एक नया अध्याय जुड़ गया है. बता दें कि मणिपुर में हिंसा के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा शांति समझौता कराया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.उन्होंने लिखा, यूएनएलएफ, मणिपुर का सबसे पुराना घाटी-आधारित सशस्त्र समूह हिंसा छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहमत हो गया है. ” गृह मंत्री ने कहा, “मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनका स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं.” गृह मंत्रालय द्वारा कई अन्य चरमपंथी संगठनों के साथ यूएनएलएफ पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ दिनों बाद शांति समझौता हुआ. यह निर्णय तब लिया गया,

जब केंद्र को लगा कि ये संगठन मणिपुर में सुरक्षा बलों, पुलिस और नागरिकों पर हमलों और हत्याओं के साथ-साथ भारत की संप्रभुता एवं अखंडता के लिए हानिकारक क्रियाक्लाप में शामिल हैं. कुछ दिन पहले, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के करीबी सूत्रों ने कहा था कि राज्य सरकार समूह के साथ शांति समझौते पर पहुंचने की कगार पर है. रविवार को इंफाल में संविधान दिवस कार्यक्रम में सिंह ने भी कहा था कि शांति वार्ता उन्नत चरण में है. सूत्रों ने कहा कि अनौपचारिक बातचीत पिछले साल 3 मई को राज्य में चल रहे जातीय संघर्ष शुरू होने से काफी पहले शुरू हो गई थी. यह सफलता महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक, घाटी स्थित किसी भी मैतेई विद्रोही समूह ने कभी भी केंद्र के साथ समझौता नहीं किया था या शांति वार्ता में भाग भी नहीं लिया था.

यूएनएलएफ क्या है?

एरियाबम समरेंद्र सिंह के नेतृत्व में यूएनएलएफ उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में सबसे पुराना मैतेई उग्रवादी समूह है. इसे 24 नवंबर, 1964 को स्थापित किया गया था. 70 और 80 के दशक में, समूह ने मुख्य रूप से लामबंदी और भर्ती पर ध्यान केंद्रित किया. साल 1990 में, इसने भारत से मणिपुर की ‘मुक्ति’ के लिए एक सशस्त्र संघर्ष शुरू करने का निर्णय लिया. उसी वर्ष, इसने मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए) नामक एक आर्म्स विंग का गठन किया था.

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